श्रीलंका संगोष्ठी में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को लेकर ठोस कदम उठाने का आह्वान
डॉ. अस्मा अर्शी
कोलंबो (आरएनआई)। भारत–श्रीलंका लीडरशिप एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत “जेंडर मुद्दों पर भू-राजनीतिक दृष्टिकोण” विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन श्री जयवर्धनेपुरा विश्वविद्यालय के विमलधर्मा मैंशन में किया गया। कार्यक्रम में भारत और श्रीलंका के शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण, समावेशी शिक्षा तथा सामाजिक न्याय से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. आशा फर्नांडो ने की तथा समन्वय डॉ. कौशल्या हेवावासम द्वारा किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य दक्षिण एशिया में लैंगिक चुनौतियों पर संवाद को बढ़ावा देना तथा दोनों देशों के बीच सहयोग को सशक्त बनाना था।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. रसान्जली परेरा ने श्रीलंका में महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ बनाने के लिए मजबूत कानून, बेहतर प्रशासन और शिक्षा के अधिकारों की गारंटी पर बल दिया।
«“महिलाओं को शिक्षा और अधिकार आधारित शासन व्यवस्था के माध्यम से सशक्त बनाना सतत राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त है।” – प्रो. रसान्जली परेरा»
प्रो. डॉ. आशा फर्नांडो ने कार्यरत महिलाओं के समक्ष आने वाली मनोवैज्ञानिक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए संस्थानों से अधिक संवेदनशील कार्यस्थल नीतियाँ तथा मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र विकसित करने का आग्रह किया।

«“महिलाओं की पूर्ण भागीदारी तभी संभव है जब संस्थाएँ उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता दें।” – प्रो. डॉ. आशा फर्नांडो»
डॉ. कौशल्या हेवावासम ने लैंगिक आधारित हिंसा (Gender-Based Violence) के मुद्दे पर चर्चा करते हुए कठोर कानूनों, जन-जागरूकता और उत्तरदायी नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया।
«“केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं; जागरूकता, जवाबदेही और प्रतिबद्ध नेतृत्व भी उतने ही आवश्यक हैं ताकि सभी के लिए सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।” – डॉ. कौशल्या हेवावासम»

भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंसार वेलफेयर ट्रस्ट की कार्यकारी निदेशक डॉ. असमा अर्शी ने महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
«“हर महिला के पास समाज को देने के लिए कुछ विशेष होता है। शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और नेतृत्व के अवसर महिलाओं को सशक्त बनाते हैं, जिससे परिवार, समुदाय और राष्ट्र मजबूत होते हैं।” – डॉ. असमा अर्शी»
कार्यक्रम का समापन “उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा: समावेशी उच्च शिक्षा के लिए स्नातक छात्रों का सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा के साथ हुआ। चर्चा में अकादमिक संस्थानों को अधिक समावेशी और समानतापूर्ण बनाने के उपायों पर विचार किया गया।



इस कार्यक्रम में महिला एवं जेंडर अध्ययन, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान तथा मानविकी विभागों के लगभग 80 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम सेंटर फॉर वीमेन थिंकर्स एंड साइंटिस्ट्स तथा जेंडर सेल, यूनिवर्सिटी ऑफ श्री जयवर्धनेपुरा द्वारा अंसार वेलफेयर ट्रस्ट, भारत के सहयोग और इंडिया–श्रीलंका फाउंडेशन के समर्थन से आयोजित किया गया।
आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच नेतृत्व विकास, ज्ञान के आदान-प्रदान और समावेशी समाज के निर्माण हेतु साझा प्रयासों को बढ़ावा देना है।
मीडिया संपर्क:
अंसार वेलफेयर ट्रस्ट, भारत
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