योगी सरकार का कदम, जातिगत रैलियां और पोस्ट होंगी अपराध
नई दिल्ली (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश सरकार ने जातिगत भेदभाव को रोकने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार अब पुलिस न तो किसी आरोपी या व्यक्ति से उसकी जातिगत पहचान पूछेगी और न ही उसे किसी भी दस्तावेज़ में दर्ज करेगी।
इस आदेश के तहत पुलिस विभाग के सभी कागजात से जातिगत कॉलम हटाया जाएगा। भविष्य में छपने वाले नए प्रपत्रों में भी जाति का कोई उल्लेख नहीं होगा।

सोशल मीडिया और रैलियों पर भी निगरानी
नए आदेश के बाद सोशल मीडिया पर जाति के महिमामंडन या किसी जाति को अपमानित करने वाली टिप्पणी गैरकानूनी मानी जाएगी। ऐसा करने वालों पर उपयुक्त धाराओं में कानूनी कार्रवाई होगी और दोषी को जेल तक जाना पड़ सकता है।
-
वाहनों पर जातीय महिमामंडन लिखना अपराध माना जाएगा।
-
जातीय आधार पर रैलियां आयोजित करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
अदालत के निर्देश के बाद फैसला
यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सुनवाई के बाद जारी किया गया। एक आरोपी ने अदालत में शिकायत की थी कि पुलिस ने उससे उसकी जाति पूछी। अदालत ने माना कि यह व्यवहार संविधान प्रदत्त गरिमामय जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।
इसके बाद कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि जातिगत भेदभाव खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इसी अनुपालन में यूपी के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने 21 सितंबर 2025 को आदेश जारी किया।
सरकार की उम्मीदें
सरकार का मानना है कि इस आदेश से:
-
पुलिसिया कार्रवाई में निष्पक्षता आएगी।
-
सोशल मीडिया पर जातीय वैमनस्य पर अंकुश लगेगा।
-
समाज में बढ़ती जातिगत खाई को पाटने की दिशा में सकारात्मक माहौल बनेगा।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जातिवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा, यह कहना जल्दबाज़ी होगी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)