भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम समझौते ने बदले रिश्ते, 2014 के बाद खुली आपूर्ति की राह
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति समझौता दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों में एक अहम पड़ाव माना जाता है। लंबे समय तक ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम देने से इनकार किया था, लेकिन 2014 में हुए नागरिक परमाणु सहयोग समझौते के बाद दोनों देशों के बीच आपूर्ति का रास्ता खुल गया।
ऑस्ट्रेलिया ने 1974 और 1998 में भारत के परमाणु परीक्षणों के बाद यूरेनियम निर्यात पर रोक लगा दी थी। उसका कहना था कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि भारत इस संधि को भेदभावपूर्ण मानता रहा है।
2007 में तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने भारत को यूरेनियम बेचने का समर्थन किया था, लेकिन उसी वर्ष सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया।
बाद में दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हुआ और 2014 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर सहमति बनी। इसके बाद भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात का रास्ता खुल गया। ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक माना जाता है, जिससे यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
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