संभल हिंसा मामला: पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देगा पुलिस विभाग
संभल (आरएनआई)। संभल हिंसा मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी, कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर सहित 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर अभी तक अमल नहीं हुआ है। इसके बजाय संभल पुलिस इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि पुलिस कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर कर उसे निरस्त कराने की मांग करेगी, क्योंकि बवाल के दौरान पुलिस की ओर से कोई फायरिंग नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि घायल युवक को लगी गोली पुलिस की नहीं थी और उसके पिता द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं।
इस मामले में यामीन नामक व्यक्ति ने खग्गू सराय निवासी अपने बेटे आलम को गोली लगने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और 15 से 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों को नामजद किया है। यामीन का कहना है कि 24 नवंबर की सुबह उसका बेटा बिस्किट बेचने के लिए निकला था, तभी पुलिस की फायरिंग में उसे तीन गोलियां लगीं, जिसके बाद परिजनों ने छिपकर इलाज कराया।
हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों के मुताबिक बवाल सुबह 7:45 बजे हुआ था और जामा मस्जिद क्षेत्र में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था थी, जिससे किसी ठेले के वहां तक पहुंचने की संभावना ही नहीं थी। डीएम और एसपी का कहना है कि युवक के घायल होने की घटना पुलिस की फायरिंग से जुड़ी नहीं है।
घायल आलम की बहन रजिया ने बताया कि उसका भाई पहले से ही दिव्यांग है और तीन पहिया ठेले पर बिस्किट बेचकर परिवार का भरण-पोषण करता था। गोली लगने के बाद उसकी हालत कमजोर हो गई है और परिवार पर इलाज का भारी आर्थिक बोझ पड़ गया है। रजिया ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उनके परिवार को परेशान कर रही है, जिससे उनके पिता और भाई को घर छोड़कर जाना पड़ा है।
फिलहाल यह मामला हाईकोर्ट जाने की दहलीज पर है, जहां अब यह तय होगा कि मजिस्ट्रेट के आदेश पर एफआईआर दर्ज होगी या पुलिस की अपील स्वीकार की जाएगी।
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