नीट-यूजी विवाद का एक और दर्दनाक पहलू: लातूर में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली छात्रा ने की आत्महत्या
देशभर में नीट-यूजी परीक्षा को लेकर मचे बवाल और अनिश्चितता के बीच एक बेहद दुखद और झझोंर देने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के लातूर जिले के गोंडेगांव में एक 18 वर्षीय छात्रा मैथिली अशोक सोनवणे ने परीक्षा से जुड़े मानसिक तनाव के कारण मौत को गले लगा लिया। मैथिली के पिता, जो पेशे से एक साधारण किसान हैं, ने रुंधे गले से बताया कि उनकी बेटी का सपना एक काबिल डॉक्टर बनने का था और उसने इसके लिए दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत की थी। 3 मई को हुई परीक्षा के बाद वह अपने प्रदर्शन को लेकर काफी आश्वस्त थी, लेकिन उसके बाद सामने आए पेपर लीक विवाद और परीक्षा रद्द होने की खबरों ने उसे भीतर से तोड़ दिया।
भविष्य को लेकर गहराती चिंताओं और मानसिक दबाव को वह मासूम सहन नहीं कर पाई और 16 मई की सुबह उसने अपने ही खेत में एक पेड़ से फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक खामियों के कारण युवाओं पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। 23 लाख से ज्यादा छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा के रद्द होने के बाद अब दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी तय हुई है, लेकिन मैथिली जैसी होनहार छात्रा का इस दुनिया से चले जाना पूरे देश और व्यवस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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