लद्दाख पर चीन के बयान से भड़के ताशी ग्यालसन, बोले- अपनी हद में रहे बीजिंग
लेह। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता देने पर चीन की आपत्ति के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC), लेह के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद ताशी ग्यालसन ने चीन के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लद्दाख भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने बीजिंग को अपनी हद में रहने की नसीहत भी दी।
ग्यालसन की यह प्रतिक्रिया चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के उस बयान के बाद आई, जिसमें चीन ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देने की बात कही थी। ग्यालसन ने आरोप लगाया कि चीन खुद दूसरे देश के क्षेत्र पर कब्जा किए हुए है और इसके बावजूद लद्दाख को लेकर आपत्तिजनक बयान दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार चीन की आपत्तियों का पहले ही जवाब दे चुकी है।
ताशी ग्यालसन ने केंद्र सरकार से अक्साई चिन का नाम बदलकर ‘अक्साई हिंद’ करने की मांग भी की। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र पर चीन का कब्जा है, वह भारत का हिस्सा है और उसे अक्साई हिंद कहा जाना चाहिए। यह उनकी ओर से सरकार को दिया गया सुझाव है; नाम बदलने के संबंध में किसी सरकारी फैसले की घोषणा नहीं हुई है।
विवाद की पृष्ठभूमि में भारत द्वारा लद्दाख के 28 भौगोलिक स्थानों और विशेषताओं के नाम आधिकारिक नक्शों पर मानकीकृत करने का फैसला भी शामिल है। भारत ने इन नामों को सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शों में शामिल किया है, जबकि चीन ने इस कदम पर आपत्ति जताई है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि लद्दाख देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा चीन की आपत्तियों से यह स्थिति नहीं बदलती। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय दावों और सीमा संबंधी मतभेदों के बीच इस मुद्दे पर कूटनीतिक बयानबाजी जारी है।
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