नॉर्थईस्ट डायरी: नगा संगठनों की चेतावनी- अगर केंद्र व मणिपुर सरकार सुरक्षा में विफल रहे, तो चीन से मदद लेंगे
नई दिल्ली। भारत-म्यांमार सीमा से लगे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नगा नागरिकों की सुरक्षा को लेकर मणिपुर के एक तंगखुल नगा छात्र एवं नागरिक समाज संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारें सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहती हैं, तो वे पड़ोसी देशों से मदद लेने पर विचार करने को मजबूर हो सकते हैं।
इंफाल में तंगखुल अज़े कतमानाओ लॉन्ग (TAKL), जिसे दक्षिणी तंगखुल छात्र संघ के नाम से भी जाना जाता है, के अध्यक्ष यारचुइसो काशुंग ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोग लगातार असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र और मणिपुर सरकार स्वदेशी नागरिकों, विशेषकर संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में रहने वालों की रक्षा करने में असमर्थ रहती हैं, तो उनके पास पड़ोसी देशों से मदद मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
काशुंग ने हाल में तामेंगलोंग, सेनापति और कामजोंग जिलों में नगा नागरिकों की हुई मौतों का हवाला देते हुए जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही घटनाओं के कारण सीमा क्षेत्र के लोगों में अलगाव की भावना बढ़ रही है और उन्हें लगने लगा है कि उनकी सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
उन्होंने मणिपुर के मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है, तो मुख्यमंत्री को स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब मणिपुर के नगा और कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव से जुड़ी हिंसक घटनाओं को लेकर चिंता बनी हुई है। हाल के दिनों में कामजोंग और सेनापति क्षेत्रों में नगा नागरिकों की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनकी जांच और जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं।
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