19 जून शुक्रवार की सुबह होगा राजा नाभिराय के यहां तीर्थंकर आदि कुमार का जन्म
गुना। (आरएनआई) आज सुबह शुक्रवार राजा नाभिराय के यहां तीर्थंकर आदिनाथ का अलौकिक जन्मकल्याणक एवं पांडुकशिला पर महाअभिषेक*_
तीसरा दिन यानी 19 जून तीर्थंकर बालक के जन्मकल्याणक का साक्षी बनेगा। प्रात: 5:30 बजे मंगलाष्टक, दिग्वंदन और रक्षा मंत्र पूर्वक नित्यमह अभिषेक तथा शांतिधारा पूजन किया जाएगा। इसके तुरंत बाद प्रात: 6:30 बजे वह पावन घड़ी आएगी जब तीर्थंकर बालक का जन्म होगा। बालक के जन्म लेते ही प्रतीकात्मक अयोध्या नगरी में चारों ओर बधाइयां बंटने लगेंगी और पूरा पंडाल भक्ति तथा आनंदमय नृत्य से सराबोर हो उठेगा। प्रात: 8:00 बजे सौधर्म इंद्र अपने पूरे राजसी ठाठ-बाठ के साथ अपने विशाल डेरे से दिव्य ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर निकलेंगे और अयोध्या नगरी की तीन गगनभेदी परिक्रमा करेंगे। इसके बाद उनका अयोध्या नगरी में प्रवेश होगा, जहाँ कुबेर द्वारा रत्न वृष्टि की जाएगी। इसके पश्चात सौधर्म इंद्र एवं शचि इंद्राणी के बीच तीर्थंकर बालक की महिमा को लेकर सुंदर चर्चा होगी। तत्पश्चात, सौधर्म इंद्र तीर्थंकर बालक को अत्यंत विनयपूर्वक अपनी गोदी में लेकर ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होंगे और विशाल देव-समुदाय के साथ पांडुकवन की ओर प्रस्थान करेंगे। प्रात: 8:30 बजे पूज्य मुनि श्री के मंगल प्रवचन (देशना) प्रारंभ होंगे और इसी के समानांतर नगर में एक ऐतिहासिक एवं भव्य जुलूस निकाला जाएगा। प्रात: 9 बजे पांडुकशिला पर सौधर्म इंद्र और अन्य देवों द्वारा 1008 मंगल कलशों की पवित्र धाराओं से तीर्थंकर बालक का महामस्तकाभिषेक (जन्माभिषेक) अत्यंत जयकारों के साथ किया जाएगा। शाम 6 बजे के सत्र में रोज़ की भांति जिज्ञासा समाधान, आचार्य भक्ति और देव-शास्त्र-गुरु की महाआरती उतारी जाएगी। रात्रि 7:30 बजे का समय सबसे आकर्षक होगा, जब सौधर्म इंद्र द्वारा तीर्थंकर बालक की भक्ति में लीन होकर अलौकिक तांडव नृत्य प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद प्रभु को पालना झुलाने की रस्म और तीर्थंकर बालक की बाल क्रीड़ाओं का अत्यंत मनोहर और नयनाभिराम दृश्य रंगमंच पर सजीव किया जाएगा।
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