'हिंदी में तकनीकी शिक्षा' पर एक दिवसीय सेमिनार’
ग्वालियर (आरएनआई)18 जनवरी 26, रविवार, सुबह 11 बजे, होटल एंबेसेडर, जिंसी रोड 1, ग्वालियर में इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के सक्रिय तत्वावधान में “हिंदी में तकनीकी शिक्षा” पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य तकनीकी हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की पहुंच समाज के व्यापक वर्गों तक विस्तारित करना था। एक दिवसीय संगोष्ठी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुए नवीनतम नवाचारों और विकास तथा उनके सामाजिक संबंधों पर शोध अध्ययन संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई। वक्ताओं ने अपने आलेख पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें मुख्य रूप से मानव-एआई सहयोग, प्रौद्योगिकी एवं सामाजिक नवाचार, राजभाषा एवं प्रौद्योगिकी का संगम जैसे विषय शामिल थे।
ग्वालियर स्थित आई.ई.आई. केंद्र, इंजीनियरों प्रोफेशनल उत्थान के लिये पिछले 55 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय है।

इस संस्थान ने हिंदी भाषा के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच के अंतर को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित संगोष्ठी की अवधारणा और समर्थन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान निरंतर वैज्ञानिक ज्ञान को आम जनता तक, विशेष रूप से भारतीय भाषाओं के माध्यम से, सुलभ बनाने की दिशा में कार्यरत है, ताकि विज्ञान संचारकों, छात्रों, शिक्षकों, नवप्रवर्तकों और नागरिकों को वैज्ञानिक ज्ञान को बेहतर ढंग से समझने और लागू करने में सहायता मिल सके।
इस कार्यक्रम के दौरान, आई ई आई ग्वालियर के चेयरमैन श्री चंद्र शेखर मालवी और लोकप्रिय वरिष्ठ प्रमुख श्री राधाकृष्ण खेतान ने तकनीकी हिंदी और प्रभावी विज्ञान संचार के महत्व उल्लेख किया, जिससे अनुसंधान और नवाचार को समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचाया जा सके।
संगोष्ठी में 16 इंजीनियरों ने सक्रिय भाग लिया। प्रतिभागियों ने हिंदी में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार में सरकार के निरंतर प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें 1952 से लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका "विज्ञान प्रगति" का प्रकाशन भी शामिल है। कीनोट स्पीकर श्री शुक्ला ने तकनीकी शिक्षा में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की पहलों का उल्लेख किया, जिसमें विज्ञान पर हिंदी में चर्चा, निर्धारित आधिकारिक भाषा मानकों के अनुसार पीएचडी शोधपत्रों का संकलन और अवधारणात्मक स्पष्टता बढ़ाने के लिए कुछ स्नातक व्याख्यानों का हिंदी में संचालन शामिल है। आगामी वेबीनार के बारे में भी बताया गया। यह भी कहा गया कि संगोष्ठी ने हिंदी में सार्थक तकनीकी चर्चा की शुरुआत की है और तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान में इसके उपयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस संगोष्ठी में ग्वालियर के प्रख्यात शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, स्टार्टअप, उच्च शिक्षा और प्रशासन में हिंदी के उपयोग जैसे समकालीन विषयों पर विशेष व्याख्यान शामिल थे।
श्री शुक्ला ने कार्यक्रम में उपस्थित एम.आई.टी.एस. के वरिष्ठतम प्रोफेसर जैन का IEI कैप पहना कर सम्मान किया।
समापन सत्र में, सचिव इं छवि सक्सेना ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया और संगोष्ठी के मुख्य निष्कर्षों की जानकारी दी गई। इस बात पर बल दिया गया कि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को हिंदी सहित भारतीय भाषाओं में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नवीनतम और सामाजिक रूप से प्रासंगिक विकास पर चर्चा करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता है।
इस संगोष्ठी ने समस्त नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में वैज्ञानिक जागरूकता प्रदान करने में योगदान देने के साथ-साथ विज्ञान को अधिक सुलभ, सहभागी और सामाजिक रूप से प्रासंगिक बनाने के व्यापक लक्ष्य का समर्थन किया।
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