हिंदी थोपने पर बहस: 'किसी भी भाषा को जबरन नहीं पढ़ाया जाना चाहिए' – आदित्य का बयान

महाराष्ट्र सरकार ने सभी कक्षाओं में हिंदी को अनिवार्य बनाने का कदम उठाया है, जिस पर लगातार बहस चल रही है। इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि किसी भी भाषा को जबरन नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। जो हम अब तक सीख रहे हैं, उसे जारी रखना चाहिए। 

Friday, June 27, 2025 - 10:52
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हिंदी थोपने पर बहस: 'किसी भी भाषा को जबरन नहीं पढ़ाया जाना चाहिए' – आदित्य का बयान

मुंबई (आरएनआई) शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि किसी भी भाषा को जबरन नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र सरकार द्वारा सभी कक्षाओं में हिंदी को अनिवार्य बनाने के कथित कदम पर बहस चल रही है। 

आदित्य ने अतिरिक्त भाषा आवश्यकताओं को लागू करने के बजाय मौजूदा शैक्षिक ढांचे में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'हम मांग करते हैं कि किसी भी भाषा को जबरन नहीं पढ़ाया जाना चाहिए। जो हम अब तक सीख रहे हैं, उसे जारी रखना चाहिए। शिक्षा को बढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन बच्चों पर एक और भाषा थोपने से उन पर बोझ बढ़ेगा। केवल हिंदी ही क्यों? आप बच्चों पर कितना बोझ डालना चाहते हैं? वे जो पहले से पढ़ रहे हैं, उस पर ध्यान दें, इसे थोड़ा पुनर्गठित करें, इसे बेहतर बनाएं।'

इस बीच, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भले ही हिंदी पूरे देश में बोली जाती है, लेकिन छोटे बच्चों को इसे जबदस्ती नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, खासकर शुरुआती कक्षाओं में। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि प्राथमिक शिक्षा में हिंदी को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। कक्षा 5 के बाद बच्चों को हिंदी सीखने में कोई समस्या नहीं है। लेकिन हमें सोचना होगा कि एक छोटे बच्चे के लिए कितनी भाषाएं सीखना सही है और कहीं उस पर ज्यादा बोझ तो नहीं पड़ रहा।' उन्होंने कहा कि अगर दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है और मातृभाषा को दरकिनार कर दिया जाता है, तो यह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार को प्रारंभिक शिक्षा में हिंदी लागू करने की अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। 

24 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि हिंदी और अन्य भाषाओं को लेकर जो त्रिभाषा फॉर्मूला है, उस पर अंतिम फैसला सभी विशेषज्ञों, साहित्यकारों, नेताओं और अन्य लोगों से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा। इस मुद्दे पर रविवार रात मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा में बैठक हुई थी। बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे, राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयर और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे। 

मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में यह तय किया गया कि सभी राज्यों में क्या स्थिति है, उसका अध्ययन किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के अनुसार मराठी छात्रों को वंचित न किया जाए, इसका ध्यान रखा जाएगा। सभी विकल्पों पर विचार होगा और सभी संबंधित लोगों को इस पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। बैठक में यह संकल्प लिया गया कि मराठी भाषा के विद्वानों, साहित्यकारों, राजनीतिक नेताओं और सभी संबंधित पक्षों के साथ यह प्रस्तुति और परामर्श प्रक्रिया आयोजित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे कहा कि इस परामर्श प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इसलिए, स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे अब परामर्श प्रक्रिया के अगले चरण की शुरुआत करेंगे।

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