हाईकोर्ट के स्टे के बाद भी जारी जग्गी भवन की तोड़फोड़, अवमानना का आरोप
गुना (आरएनआई) हाईकोर्ट द्वारा स्टे दिए जाने के बाद भी शहर के पंजाबी मोहल्ला में स्थित मकान को तोड़ने का काम जारी है। इससे आदेश की अवमानना हो रही है। याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि स्टे आदेश की कॉपी लेने कोई अधिकारी तैयार नहीं है इस कारण प्रमाण के लिए आदेश व्हाट्स एप से भेजे गए हैं।
गौतलब है कि लाहोटी मार्ग पर पंजाबी मोहल्ला स्थित दो मंजिला मकान जग्गी भवन के वारिसों में विवाद का केस गुना कोर्ट में प्रचलित था। जिसमें शशि जग्गी ने सुनीता जग्गी, विनीत जग्गी, दिनेश जग्गी, राजेश जग्गी, विजय जग्गी, ओमप्रकाश जग्गी, सूरज जग्गी के विरुद्ध वाद दायर किया था। गुना कोर्ट ने फैसला शशि के खिलाफ दिया और मकान खाली करने के आदेश जारी किए। इसके बाद प्रशासन ने मकान खाली कराने की कार्यवाही कराई थी।
बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता शशि जग्गी को छोड़कर अन्य वारिसों ने इस बेशकीमती मकान का सौदा जमीन और प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के कारोबार से जुड़े शहर के एक चर्चित नेता परिवार से कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि इसी के चलते प्रशासन ने न केवल मकान खाली कराने में तेजी दिखाई थी बल्कि नेता पुत्र की मौजूदगी में मकान की तोड़फोड़ भी शुरू करा दी गई थी।
निचली अदालत के आदेश के विरुद्ध याचिकाकर्ता शशि जग्गी ने हाईकोर्ट में शरण ली और याचिका दायर करते हुए कार्यवाही रोकने की याचना की। जिस पर 13 अगस्त को सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने आगामी आदेश तक मौके पर यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता के वकील कुलदीप गुर्जर ने बताया कि, कोर्ट के आदेश की कॉपी तहसीलदार और नगरपालिका सीएमओ को व्हाट्स एप कर दी गई है। इससे कुछ देर के लिए भवन की तोड़फोड़ का काम रोक दिया गया। लेकिन कुछ देर बाद तोड़फोड़ फिर से शुरू कर दी गई है। ये सीधे सीधे हाई कोर्ट की अवमानना का मामला बन गया है।
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