समोसे के लिए रुकी ट्रेन? इंदौर में 'स्वाद' ने लगवाया ब्रेक!
इंदौर वालों के खाने-पीने के किस्से तो दुनिया भर में मशहूर हैं। यहां पोहा-जलेबी सिर्फ नाश्ता नहीं, संस्कृति है और समोसा किसी धर्मग्रंथ से कम नहीं। लेकिन अब तो लगता है कि स्वाद ने रफ्तार को भी मात दे दी है। चर्चा है कि अगर समोसा गरम हो, तो डेमू ट्रेन भी "ब्रेकफास्ट ब्रेक" पर चली जाती है!
सुना है इंदौर-महू डेमू का नया अनौपचारिक स्टेशन बन गया है—"समोसा हाल्ट"। यहां न प्लेटफॉर्म है, न टिकट खिड़की, बस गरमा-गरम समोसे हैं। यात्री सोचते हैं कि शायद सिग्नल लाल है, जबकि असली सिग्नल तो कढ़ाई में तैरते समोसों से मिल रहा होता है।
अब कल्पना कीजिए, अगर यही परंपरा आगे बढ़ी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल की नई घोषणा होगी—"फ्लाइट नंबर 101 दस मिनट लेट है, क्योंकि पायलट सराफा से कचौरी पैक करा रहे हैं।" यात्री भी शायद कहेंगे, "कोई बात नहीं, हमारे लिए दो प्लेट ले आइए!"
इंदौर का खानपान दिल जीतता है, लेकिन रेल की पटरी पर स्वाद का ठहराव थोड़ा भारी पड़ सकता है। समय पर पहुंचना भी उतना ही जरूरी है, जितना गरम समोसा खाना। आखिर रेलवे टाइम टेबल से चलती है, चटनी के स्वाद से नहीं।
वैसे जांच अभी जारी है। इसलिए यह पूरा किस्सा फिलहाल सोशल मीडिया की चटपटी थाली में परोसा गया व्यंग्य ही समझिए। अगर आरोप सही निकले, तो कहना पड़ेगा—इंदौर वालों ने स्वाद के लिए सचमुच रफ्तार को भी "समोसा ब्रेक" दे दिया!
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