सबरीमला में प्रसाद व्यवस्था पर सवाल, हाईकोर्ट सख्त; एसआईटी को 45 दिन में जांच पूरी करने के निर्देश
तिरुवनंतपुरम (आरएनआई)। केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला मंदिर में प्रसाद की बिक्री और उससे होने वाली आय के प्रबंधन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (टीडीबी) की कार्यप्रणाली में गंभीर और प्रणालीगत खामियां पाए जाने की बात कही है। साथ ही मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) को 45 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रसाद व्यवस्था से जुड़ी आय का प्रबंधन जिस तरह से किया जा रहा है, उसमें पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव नजर आता है। अदालत के अनुसार, अब समय आ गया है कि देवास्वम बोर्ड एक ऐसा व्यापक और मजबूत ढांचा तैयार करे, जिससे मंदिर की आय सुरक्षित रहे और किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार की गुंजाइश न बचे।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि सबरीमला जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तीर्थस्थल में श्रद्धालुओं की आस्था सीधे तौर पर प्रसाद व्यवस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में इस व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह लाखों भक्तों के विश्वास को भी ठेस पहुंचा सकती है।
हाईकोर्ट ने एसआईटी से अपेक्षा जताई कि वह तय समय-सीमा में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट पेश करे, ताकि आगे आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। साथ ही देवास्वम बोर्ड को भी संकेत दिया गया है कि वह मौजूदा प्रणाली की समीक्षा कर पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही को प्राथमिकता दे।
इस आदेश के बाद सबरीमला मंदिर की प्रसाद व्यवस्था और उससे जुड़ी आय के प्रबंधन पर एक बार फिर निगाहें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़े प्रशासनिक फैसले और संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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