भीषण गर्मी से जूझ रहा यूरोप, 40°C पार तापमान के बीच भी एसी से दूरी क्यों?
यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सड़कें पिघल रही हैं, रेल सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके बावजूद यूरोप के कई घरों, स्कूलों और यहां तक कि अस्पतालों में भी एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल अब भी सीमित है।
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में लंबे समय से एसी लगाने को लेकर झिझक रही है। इसके पीछे जलवायु संरक्षण के लक्ष्य, ऐतिहासिक इमारतों की वास्तुकला को सुरक्षित रखना, शोर प्रदूषण और शहरी नियोजन जैसी कई वजहें हैं।
हालिया हीटवेव ने यूरोप के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव डाला है। कई स्थानों पर सड़कें पिघल गईं, ट्राम की पटरियां टेढ़ी हो गईं, ट्रेन सेवाएं बाधित हुईं और अस्पतालों में गर्मी से संबंधित मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके बावजूद कई शहर एसी के व्यापक उपयोग से बचने की नीति पर कायम हैं।
यूरोप के कई शहरों के योजनाकारों का मानना है कि इमारतों के बाहर लगे एसी यूनिट ऐतिहासिक शहरों की सुंदरता को प्रभावित करते हैं। पेरिस की उपमहापौर ऑद्रे पुलवार के अनुसार, शहर को ऐसी जगह नहीं बनाया जा सकता जहां हर इमारत के बाहर एसी की बड़ी-बड़ी मशीनें लगी हों, क्योंकि इससे शोर, गर्मी और पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है।
पेरिस जैसे शहरों में यदि किसी भवन के बाहर लगाया जाने वाला एसी ऐतिहासिक चूना-पत्थर की इमारतों की सुंदरता को प्रभावित करता है, तो उसकी अनुमति नहीं दी जाती।
यूरोप के कई हिस्सों में एसी लगाना केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं होता। अपार्टमेंट में रहने वालों को कई बार पड़ोसियों की सहमति लेनी पड़ती है, जबकि स्थानीय प्रशासन निर्माण नियमों, ऊर्जा दक्षता मानकों और शोर संबंधी नियमों के आधार पर अनुमति देता है। यही वजह है कि रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बावजूद यूरोप में एसी का इस्तेमाल कई अन्य देशों की तुलना में अब भी सीमित बना हुआ है।
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