पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन तेज, आंदोलनकारियों ने दमन रोकने की मांग उठाई
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में महंगाई, आर्थिक संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। रावलकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे आंदोलन के दौरान नागरिक अधिकार कार्यकर्ता **सरदार अमन खान** ने दावा किया कि पीओके की जनता पाकिस्तान की नीतियों से असंतुष्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दमन और उपेक्षा जारी रही तो लोग भविष्य के विकल्पों पर विचार करेंगे।
प्रदर्शनकारी महंगाई, आवश्यक वस्तुओं की कमी, प्रशासनिक विफलता और कथित सरकारी दमन के खिलाफ 38 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और उन्हें पर्याप्त राजनीतिक एवं प्रशासनिक ध्यान नहीं मिला।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं और असहमति की आवाजों को दबाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच, **जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC)** ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को पीओके जाने से रोका गया। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक असहमति को दबाने का प्रयास बताया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व **महमूद खान अचकजई** कर रहे थे, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री **शाहिद खाकान अब्बासी** भी शामिल थे।
वहीं, बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता **उमर करीम** ने घोषणा की है कि वे बलूचिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए 1 से 3 जुलाई तक लंदन में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
**नोट:** पीओके से जुड़ी कई घटनाओं और दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। इसलिए प्रदर्शनकारियों और संबंधित पक्षों के दावों को उनके कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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