कोलकाता (आरएनआई)। भारत निर्वाचन आयोग पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार और मंगलवार को दो चरणों में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें आयोजित कर रहा है। इन बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था, केंद्रीय बलों की तैनाती, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और अंतिम मतदाता सूची की स्थिति पर विस्तृत चर्चा होगी।
आयोग द्वारा अंतिम मतदाता सूची पहले ही प्रकाशित की जा चुकी है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए नामों को सूची से अलग रखा गया है। इसके बाद चुनावी तैयारियों को तेज करते हुए प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू की गई है।
बैठकों का पहला चरण सोमवार सुबह वर्चुअल माध्यम से आयोजित होगा, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल, अतिरिक्त और संयुक्त सीईओ, सभी जिला निर्वाचन अधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) तथा जिला पुलिस अधीक्षक शामिल होंगे। इस दौरान राज्य में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 240 कंपनियों की मौजूदा तैनाती और उनके उपयोग की रणनीति पर विशेष फोकस रहेगा। आयोग यह आकलन करेगा कि संवेदनशील क्षेत्रों में क्षेत्र प्रभुत्व और सुरक्षा समन्वय किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, 10 मार्च से दूसरे चरण में 240 अतिरिक्त कंपनियों की संभावित तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है।
बैठक में लगभग 60 लाख मतदाताओं से जुड़े दस्तावेजों के न्यायिक निपटारे की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। इन मामलों की जांच आयोग द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से की जा रही है और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना प्राथमिकता में है।
मंगलवार को बैठक का दूसरा चरण नई दिल्ली से वर्चुअल रूप में आयोजित होगा। इसमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य के नोडल पुलिस अधिकारी और केंद्रीय सुरक्षा व जांच एजेंसियों के समन्वय अधिकारी भाग लेंगे। इस चरण में सीएपीएफ के प्रभावी उपयोग, राज्य व केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल, धनबल, शराब और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग पर रोक तथा अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
मतदान की तारीखों और आदर्श आचार संहिता को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। पहले अनुमान लगाया जा रहा था कि होली के बाद मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाएगा, लेकिन मतदाता दस्तावेजों से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया लंबित होने के कारण अब कार्यक्रम मार्च के दूसरे सप्ताह में घोषित होने की संभावना जताई जा रही है।
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