ट्रांसजेंडर कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र और राज्यों से जवाब तलब, तीन जजों की बेंच करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों से जुड़े संशोधित कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए साफ किया कि फिलहाल किसी अंतरिम राहत पर विचार नहीं किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा। मामले को छह सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
गौरतलब है कि संसद ने 25 मार्च को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संरक्षण और अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक को पारित किया था, जिसे 30 मार्च को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। संशोधित कानून में ‘सामाजिक अभिविन्यास’ को दायरे से बाहर रखने और अपराधों के लिए अलग-अलग सजा का प्रावधान शामिल किया गया है।
इसी दौरान अदालत ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल में बढ़ती रिक्तियों पर भी गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा और समयबद्ध तरीके से खाली पदों को भरने पर जोर दिया। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से भी इस मामले में सहयोग करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, यदि जल्द नियुक्तियां नहीं की गईं तो साल के अंत तक ट्रिब्यूनल की 11 में से केवल तीन पीठें ही कार्यरत रह जाएंगी, जिससे सैन्य मामलों की सुनवाई पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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