इलाहाबाद हाईकोर्ट का UPCA और BCCI पर सख्त रुख, संपत्तियों और वैधता पर उठे बड़े सवाल
इलाहाबाद (आरएनआई) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट से जुड़े एक अहम मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से कई महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर जवाब मांगा है। यह सुनवाई रिट याचिका संख्या 3329/2026 में हुई, जिसमें “द क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश” ने पुरानी और नई UPCA के बीच संपत्तियों के हस्तांतरण को चुनौती दी है।
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि 1955 में पंजीकृत “द उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन” को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की धारा 13 के तहत भंग किया गया था, तो उसकी संपत्तियां किसे हस्तांतरित हुईं — सरकार को या 2005 में कंपनी अधिनियम के तहत बनी नई UPCA को। कोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी भंग सोसाइटी की संपत्ति और देनदारियों को दूसरी संस्था द्वारा लेना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने वर्तमान UPCA को आदेश दिया है कि वह अपनी किसी भी अचल संपत्ति का हस्तांतरण न करे। साथ ही, बैंक खातों, चल संपत्तियों और आय-व्यय का पूरा ब्यौरा शपथपत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि खातों में किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं होनी चाहिए।
BCCI से भी अदालत ने पूछा है कि क्या UPCA उसकी विधिवत संबद्ध इकाई है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि BCCI अपनी संबद्धता से जुड़े दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश करे। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि BCCI एक सार्वजनिक दायित्व निभाने वाली संस्था है और उसे निष्पक्षता व पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।
मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि UPCA पर लगभग 90 करोड़ रुपये से अधिक का कर बकाया है और उसके कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया है।
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी पूछा है कि खेल राज्य सूची का विषय होने के बावजूद प्रदेश में क्रिकेट के विकास को लेकर अब तक कोई स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाई गई।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों—UPCA, BCCI, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार—को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
फिलहाल, अदालत के अंतरिम आदेश से UPCA की संपत्तियों पर रोक लग गई है और BCCI की भूमिका व वैधता भी न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है।
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