सुप्रीम कोर्ट में असम सीएम हिमंत सरमा के खिलाफ एक और याचिका सूचीबद्ध, नफरती भाषण के आरोपों पर होगी सुनवाई
नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर दायर एक और याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। इससे पहले भी उनके खिलाफ एक अलग याचिका में वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की मांग की गई थी। अब नई याचिका को भी उसी मामले के साथ सूचीबद्ध किए जाने की बात कही गई है।
बुधवार को अदालत के समक्ष यह अनुरोध रखा गया कि हालिया याचिका को पहले से लंबित याचिका के साथ जोड़ा जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम देखेंगे।” इससे संकेत मिलता है कि दोनों मामलों पर एक साथ सुनवाई हो सकती है।
नई याचिका चार प्रतिष्ठित नागरिकों द्वारा दायर की गई है, जिनमें पूर्व प्रोफेसर हिरेन गोहेन, असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक हरेकृष्ण डेका, वरिष्ठ पत्रकार परेश चंद्र मलाकर और वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु बोरठाकुर शामिल हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने विभिन्न बयानों और सार्वजनिक भाषणों के जरिए एक समुदाय विशेष के खिलाफ कथित तौर पर नफरत और दुश्मनी को बढ़ावा दिया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के कथित बयानों से असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ हिंसा भड़कने का खतरा पैदा हो सकता है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने धर्म, भाषा, जन्मस्थान और निवास के आधार पर लोगों के बीच वैमनस्य फैलाने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया। इसमें ‘मिया’ और ‘बांग्लादेशी’ जैसे शब्दों के प्रयोग का भी उल्लेख किया गया है।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा द्वारा दायर एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। उस याचिका में एक वायरल वीडियो का हवाला दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को एक समुदाय की ओर राइफल से निशाना लगाते और गोली चलाते हुए दिखाया गया है।
अब सुप्रीम कोर्ट में इन दोनों याचिकाओं के साथ सुनवाई होने की संभावना है, जिससे असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर न्यायिक समीक्षा का रास्ता साफ हो गया है।
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