सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: सरकारी नौकरियों में पारदर्शी भर्ती जरूरी, छोटी प्रक्रियागत खामियों पर नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती
नई दिल्ली। Supreme Court of India ने सार्वजनिक रोजगार और सरकारी भर्तियों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि रिक्त पदों का उचित विज्ञापन, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया, सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियुक्ति तथा सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता एवं समान अवसर) की मूल भावना का हिस्सा है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया मूल रूप से निष्पक्ष और वैध है, तो केवल प्रक्रियागत या तकनीकी खामियों के आधार पर लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द नहीं की जानी चाहिए।
### क्या था मामला?
यह मामला कुरुक्षेत्र स्थित थानेसर सहकारी विपणन सह-प्रसंस्करण सोसायटी लिमिटेड में वर्ष 2014 में क्लर्क-सह-सेल्समैन और पियोन-सह-चौकीदार पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा था।
इन नियुक्तियों को बाद में यह कहते हुए रद्द कर दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिक सहकारी विपणन सह-प्रसंस्करण सोसायटियों स्टाफ सेवा नियमावली-2003 के संशोधित नियम-3 का पालन नहीं हुआ। नियम के अनुसार नियुक्ति के समय सहायक रजिस्ट्रार, सहकारी निरीक्षक और जिला प्रबंधक (एचएफईडी) की उपस्थिति और सहमति आवश्यक थी।
### सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:
* भर्ती के लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया था।
* चयन प्रक्रिया अपनाई गई थी।
* योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर मिला था।
* नियुक्तियां सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद की गई थीं।
* चयनित कर्मचारियों की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलती नहीं थी।
अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल कुछ अधिकारियों की बैठक में अनुपस्थिति को आधार बनाकर नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है। यदि उम्मीदवारों ने नियमों का उल्लंघन नहीं किया है और चयन प्रक्रिया का मूल ढांचा निष्पक्ष रहा है, तो उन्हें प्रक्रियागत कमियों के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
### फैसले का महत्व
यह निर्णय सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि:
* भर्ती में पारदर्शिता और समान अवसर अनिवार्य हैं।
* चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है।
* तकनीकी या छोटी प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
* भर्ती नियमों के पालन और कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार पर गौरव मेहला और अन्य की अपील स्वीकार करते हुए Punjab and Haryana High Court के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें नियुक्तियों को निरस्त करने के आदेश को बरकरार रखा गया था।
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