मतदाता तकनीकी कारणों से मताधिकार से वंचित न हों: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जमानत मामलों पर भी सख्ती

Thursday, February 5, 2026 - 11:54
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मतदाता तकनीकी कारणों से मताधिकार से वंचित न हों: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जमानत मामलों पर भी सख्ती

नई दिल्ली (आरएनआई)। सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि मतदाताओं को केवल तकनीकी कारणों के आधार पर उनके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की बुनियाद नागरिकों की भागीदारी है और प्रशासनिक या प्रक्रियागत खामियों के कारण किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से बाहर होना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने संकेत दिया कि चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और न्यायसंगत अवसर सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिकाओं की सुनवाई में हो रही देरी पर भी कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए, लेकिन कई हाईकोर्ट में जमानत अर्जियां समय पर सूचीबद्ध नहीं हो रहीं। इस पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट से लंबित जमानत मामलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस वर्ष 1 जनवरी के बाद दाखिल सभी नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं की स्थिति, अगली सुनवाई की तारीख और निर्णय की जानकारी प्रस्तुत की जाए। साथ ही इससे पहले दाखिल होकर अब तक लंबित मामलों का भी पूरा डेटा मांगा गया है।

पीठ ने कहा कि भारी लंबित मामलों का दबाव अपनी जगह है, लेकिन जमानत जैसे मामलों को टालना किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा असर डालता है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हो तो जमानत मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त बेंच गठित की जानी चाहिए। यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबित एक जमानत याचिका में बार-बार स्थगन के संदर्भ में आई।

एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पांच सितारा हयात रीजेंसी होटल से जुड़े वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) सौदों में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। अदालत ने केंद्र सरकार, संबंधित होटल कंपनी, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब नेशनल बैंक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में आरोप है कि सार्वजनिक धन से जुड़े इस मामले में संपत्तियों का मूल्यांकन कम करके समझौता किया गया। अदालत ने कहा कि सामान्यतः बैंकों के व्यावसायिक फैसलों में दखल नहीं दिया जाता, लेकिन जब मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा हो तो पारदर्शिता जरूरी हो जाती है।

वहीं, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हिरासत जारी रखने पर पुनर्विचार करने को कहा। पीठ ने कहा कि अदालत के समक्ष रखी गई चिकित्सीय रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। अदालत ने केंद्र से इस पहलू पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से इस संबंध में सरकार से निर्देश लेने को कहा।

इन सभी मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि अदालत नागरिक स्वतंत्रता, पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण को लेकर गंभीर है, चाहे मामला मताधिकार का हो, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का या सार्वजनिक धन के उपयोग का।

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