पश्चिम एशिया में जंग का 17वां दिन: दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, जापान ने होर्मुज में नौसेना भेजने से किया इनकार
पश्चिम एशिया (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध लगातार खतरनाक होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बीच Iran भी जोरदार जवाब दे रहा है और मिसाइलों व ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है। संघर्ष अब 17वें दिन में प्रवेश कर चुका है और Strait of Hormuz के आसपास जहाजों पर हमलों की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इसी बीच Japan ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वह होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहा है। जापान के प्रधानमंत्री Fumio Kishida ने संसद में कहा कि सरकार ने अभी तक एस्कॉर्ट जहाज भेजने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है और वह कानूनी ढांचे के भीतर संभावित विकल्पों पर विचार कर रही है।
तनाव का असर हवाई यात्रा पर भी देखने को मिला। Cochin International Airport के अधिकारियों ने बताया कि Emirates की फ्लाइट EK533, जो कोच्चि से Dubai जा रही थी, सुरक्षा कारणों से बीच रास्ते से ही वापस लौट आई। यह विमान सुबह 4:30 बजे 325 यात्रियों को लेकर रवाना हुआ था, लेकिन Dubai International Airport के अचानक बंद होने की सूचना मिलने पर उसे वापस लौटने का निर्देश दिया गया। विमान सुबह 8:30 बजे सुरक्षित रूप से कोच्चि हवाईअड्डे पर उतरा और यात्रियों को फिलहाल विमान में ही रहने की सलाह दी गई है।
दुबई में एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से कई सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। दुबई पुलिस के अनुसार एयरपोर्ट रोड और एयरपोर्ट टनल को बंद कर दिया गया है और वाहन चालकों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इलाके में राहत और बचाव कार्य जारी है।
रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष के दौरान ईरान ने United Arab Emirates की ओर अब तक 1800 से अधिक मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। हालांकि यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने इनमें से अधिकांश को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। इसके बावजूद दुबई और Abu Dhabi में लगातार हमलों के कारण तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, जिससे यात्रा और व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
दुबई मीडिया कार्यालय के मुताबिक एयरपोर्ट के पास गिरने वाले दो ड्रोन की वजह से चार लोग घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। ईरान का कहना है कि उसके हमलों का मुख्य निशाना अमेरिकी ठिकाने हैं, लेकिन कई बार नागरिक ढांचे भी इन हमलों की चपेट में आ गए हैं। इनमें एयरपोर्ट, बंदरगाह और तेल से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इसी बीच ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के नौसेना प्रमुख Alireza Tangsiri ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका Kharg Island पर हमला करता है, तो इसका वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ेगा। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि देश अपनी ऊर्जा सुविधाओं पर किसी भी हमले का जवाब देगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि यह एक अवैध युद्ध है जिसमें किसी की जीत नहीं होगी और आम लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं।
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