पराली जलाने के मामलों की निगरानी के लिए पूर्व जजों की समिति का प्रस्ताव, केंद्र ने जताया विरोध

केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के उस प्रस्ताव के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है, जिसमें शीर्ष न्यायालय ने पराली जलाने की निगरानी के लिए पूर्व जजों की समिति के गठन की बात कही है। बता दें कि पराली जलाने को दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का मुख्य वजह माना जाता है।

Friday, November 22, 2024 - 18:00
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पराली जलाने के मामलों की निगरानी के लिए पूर्व जजों की समिति का प्रस्ताव, केंद्र ने जताया विरोध

नई दिल्ली (आरएनआई) केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पराली जलाने पर रोक लगाने के उपायों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीशों की एक समिति बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया। पराली जलाने को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण माना जाता है। बता दें कि यह सुझाव वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष रखा।

उन्होंने प्रस्तावित तथ्य-खोज समिति के हिस्से के रूप में न्यायाधीशों की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की मांग की। न्यायमित्र ने कहा कि न्यायाधीश पहले भी वायु प्रदूषण और पराली जलाने के मुद्दों से निपट चुके हैं। शुक्रवार को न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने प्रस्ताव दिया कि इन न्यायाधीशों की एक समिति संकट से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण के लिए किसानों और सरकारी अधिकारियों समेत सभी हितधारकों की निगरानी और सुनवाई कर सकती है। अपराजिता सिंह ने कहा, इन मुद्दों से परिचित अनुभवी न्यायाधीशों की एक समिति स्थिति की कुशलतापूर्वक निगरानी कर सकती है और व्यक्तिगत शिकायतों को सुन सकती है। 

केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाली अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) पर्याप्त उपाय कर रहे हैं और एक और निगरानी परत जोड़ना प्रतिकूल होगा। हम इस सुझाव का पुरजोर विरोध करते हैं। अतिरिक्त न्यायिक समिति की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपके माननीय पहले से ही स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। हम सभी चिंताओं का जवाब दे रहे हैं, कमियों को सुधार रहे हैं और प्रगति कर रहे हैं," एएसजी भाटी ने "किसी और स्तर" के निर्माण का विरोध करते हुए कहा। 

एमिकस क्यूरी ने पंजाब और हरियाणा में जले हुए क्षेत्रों के संबंध में सीएक्यूएम और अन्य स्रोतों की तरफ बताए गए आंकड़ों में विसंगतियों को भी चिन्हित किया। अपराजिता सिंह ने कहा, पंजाब में जला हुआ क्षेत्र 2021 में 15.1 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 19.1 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो 24% की वृद्धि है। इसी तरह, हरियाणा का जला हुआ क्षेत्र 2021 में 3.5 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023 में 8.3 लाख हेक्टेयर हो गया। यह सीएक्यूएम के आंकड़ों के विपरीत है, जो हरियाणा में खेत की आग में कमी का दावा करता है," आधिकारिक रिपोर्टों की सटीकता के बारे में चिंता जताते हुए अपराजिता सिंह ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले भी प्रदूषण और पराली जलाने की भूमिका से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की थी। वहीं 2020 में, तत्कालीन सीजेआई न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने पराली जलाने से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए न्यायमूर्ति लोकुर की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया था। बाद में आदेश वापस ले लिया गया।

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