पत्रकार का घर गिराने का मामला: हाईकोर्ट का झटका, IAS अमरनाथ उपाध्याय की याचिका खारिज, 26 अफसरों पर FIR
उत्तर प्रदेश के महराजगंज में वरिष्ठ पत्रकार मनोज टिबड़ेवाल आकाश के पैतृक मकान को बुलडोजर से गिराए जाने का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में तत्कालीन जिलाधिकारी IAS अमरनाथ उपाध्याय समेत अन्य अधिकारियों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे सभी आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

यह मामला 13 सितंबर 2019 का है, जब पत्रकार के दो मंजिला मकान और दुकानों को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से बुलडोजरों से ध्वस्त कर दिया गया था। पीड़ित ने इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की, जिसकी जांच में अधिकारियों को दोषी पाया गया। इसके बाद आयोग ने मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए साफ कहा कि मकान गिराने की कार्रवाई अवैध थी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट के आदेश के बाद पीड़ित पत्रकार को मुआवजा दिया गया और राज्य सरकार के निर्देश पर महराजगंज कोतवाली में तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय समेत 26 अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

एफआईआर में प्रशासनिक, पुलिस, इंजीनियरिंग और अन्य विभागों के कई अधिकारी शामिल हैं और मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई है। यह भी माना जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण ने प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई की वैधता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद यह मामला और तेज हो गया है, जिससे संबंधित अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की राह और साफ हो गई है तथा पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।
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