नियम तोड़ने वाली बसों पर हाईकोर्ट सख्त: 45 दिन में संचालन बंद करने के आदेश

Thursday, April 2, 2026 - 20:46
Updated: 7 months ago
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नियम तोड़ने वाली बसों पर हाईकोर्ट सख्त: 45 दिन में संचालन बंद करने के आदेश

जबलपुर (आरएनआई) मध्य प्रदेश में लग्जरी एसी कोच बसों को धड़ाधड़ परमिट दिए जा रहे हैं, जबकि इनमें मोटर वाहन नियम 164 के अनुसार बायीं ओर दो दरवाजे और एक अतिरिक्त आपातकालीन द्वार नहीं है। जहां नियम का उल्लंघन हो रहा है, ऐसी बसों का संचालन 45 दिन में बंद किया जाए। हाईकोर्ट जबलपुर ने परिवहन विभाग को निर्देशित किया है। एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ स्टेज कैरिज और पर्यटक बसें में मोटर वाहन नियम 164 का अनुपालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किये है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुरक्षा मानदंडों का अनुपालन नही किया जाने बहुत ही खेदजनक स्थिति है। कई वातानुकूलित बसों,गैर-वातानुकूलित लग्जरी बसों और स्लीपर बसों में बायीं ओर दो दरवाजे और एक अतिरिक्त आपातकालीन द्वार नहीं है।

परिवहन विभाग को निर्देश, 45 दिन में संचालन बंद करें

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में आरटीओ को निर्देशित किया है कि स्टेज कैरिज और पर्यटक बसों द्वारा नियम 164 का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उनका संचालन 45 दिनों के भीतर बंद किया जाए। एकलपीठ ने परिवहन विभाग के मुख्य-अतिरिक्त सचिव को इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी शपथ पत्र में पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 अप्रैल को नियत की है।

याचिकाकर्ता के परमिट को निरस्त कर दिया था

मंडला निवासी बस ऑपरेटर राम मिलन राय की तरफ से दायर याचिका में राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण (एसटीएटी) के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में अनावेदक प्रतिद्वंद्वी ऑपरेटर द्वारा दायर संशोधन की अनुमति दी थी और याचिकाकर्ता के परमिट को निरस्त कर दिया था। याचिका में कहा गया था कि अनावेदक प्रतिद्वंद्वी रूट ऑपरेटर नहीं था। उसके पास परमिट देने पर आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं था।

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता की बस में कुल मिलाकर केवल 36 सीटें थीं, जो निर्धारित आवश्यकता से कम थीं। कोर्ट ने कहा कि नियम 164 के तहत प्रत्येक गाड़ी में बायीं ओर कम से कम दो दरवाजे होने चाहिए, एक प्रवेश के लिए और एक निकास के लिए और दाईं या पिछली तरफ एक आपातकालीन दरवाजा होना चाहिए। जबकि वर्तमान मामले में, बस में केवल एक प्रवेश द्वार और एक आपातकालीन द्वार था। कोर्ट ने कहा कि अधिकार क्षेत्र का प्रश्न निर्णायक नहीं है क्योंकि वैधानिक गैर-अनुपालन पर परमिट रद्द करना उचित है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।

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