अशोकनगर में चाइनीज मांझे का कहर, बाइक सवार दो युवक गंभीर घायल, प्रतिबंध फिर बेअसर
गुना_अशोकनगर (आरएनआई) आज अशोकनगर में दो अलग अलग बाइक पर जा रहे युवक चाइनीज़ मांझे की चपेट में आ कर गंभीर घायल हो गए। एक के गले की नली कट गई और दूसरे का कान कट गया। दोनों चलती बाइक पर मांझे में उलझ कर गिर गए, हालात गंभीर है। पिछले 10 सालों से चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध के सिर्फ आदेश ही जारी हुए। मौत का मांझा बनाने, बेचने और खरीदने वालों पर इन आदेशों का कोई असर नहीं हुआ।
#मकर_संक्रांति पर पतंगबाजी शुरू होते ही हर साल दर्जनों इंसानों की मौत इस "उड़ती ब्लेड" की धार से गर्दन कटने से हो रही हैं। मांझे में उलझ कर सैकड़ों लोग घायल हो रहे हैं, सड़क दुर्घटना का शिकार बन रहे हैं। हजारों पंछी मारे जा रहे हैं, लेकिन मांझा पर आदेशों का पालन केवल खानापूर्ति बन कर रह गया है।
#खतरनाक चाइनीज मांझा बनाने के लिए कांच को पीसकर महीन पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इसमें एल्युमिनियम, स्टील या टंगस्टन कार्बाइड जैसे धातु के कण मिलाए जाते हैं। ये कण माइक्रॉन लेवल के होते हैं, यानी इतने छोटे कि आंखों से साफ नजर भी नहीं आते। इस पाउडर को मजबूत गोंद या रेजिन में मिलाया जाता है। फिर नायलॉन या पॉलिएस्टर की पतली डोर को इस मिश्रण में डुबोकर सुखाया जाता है। कई बार सिलिकॉन या पॉलिमर भी मिलाया जाता है ताकि कण लंबे समय तक चिपके रहें। जब यह धागा पतंग के साथ हवा में तेज रफ्तार से उड़ता है, तो इसकी धार सामान्य सूती मांझे से 20 गुना तेज हो जाती है। इसके गले पर रगड़ते ही नसें और धमनियां कट जाती हैं।
नायलान मांझे के संबंध में सबसे पहले सितंबर 2016 में नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश जारी किया था। इसमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। इसके बाद एनजीटी की राष्ट्रीय बेंच ने जुलाई 2017 में प्रतिबंध के आदेश दिए। फरवरी 2024 में पर्यावरण विभाग की तरफ से प्रतिबंध की राजपत्र में अधिसूचना भी प्रकाशित की गई। पुलिस मुख्यालय ने निर्देश जारी किए। उसके बाद भी यह सभी आदेश-निर्देश पतंग की तरह हवा में ही रहे। जानलेवा मांझे के निर्माण से लेकर उपयोग तक में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों का दायित्व भी निर्धारित किया गया, पर सच्चाई यह है कि पुलिस को छोड़ बाकी विभाग सुस्त पड़े हैं। वन विभाग और स्थानीय निकायों के अधिकारियों को जैसे कुछ पता ही नहीं है कि शासन ने उन्हें भी जिम्मेदारी दी है।
#ये_थे_आदेश पर्यावरण विभाग ने 29 सितंबर 2016 को सभी कलेक्टर-एसपी को जारी निर्देश में कहा था, सिंथेटिक पदार्थ से बना मांझा इंसान, पशु-पक्षी के लिए खतरनाक है। निर्माण और बिक्री पर रोक लगाएं और जनजागरूकता करें। नौ वर्ष बाद भी स्थिति यह है कि कोई घटना हो जाने पर सरकार सक्रिय दिखती है।
#एनजीटी के निर्देश के परिपालन में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के पत्र के जवाब में मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 15 मई 2020 को पत्र लिखकर बताया कि पालन कराया जा रहा है, लेकिन सच्चाई सामने है। मंडल की तरफ से कोई निर्देश तक जारी नहीं हो रहा।
23 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय की सीआइडी शाखा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर एनजीटी और शासन के निर्देशों का पालन कराने के लिए कहा। इंदौर में मांझे से गला कटने से एक व्यक्ति की मौत, अन्य जिलों में घटनाएं होने के बाद पुलिस सक्रिय हुई। आदेश जारी होते ही धरपकड़ शुरू हो जाती तो शायद इतनी घटनाएं नहीं होती।
कुछ जिलों में ही कलेक्टरों ने बीएनएस की धारा 223 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए। यह भी खानापूर्ति रह गई। कई जगह ऐसी स्थिति भी है कि पुलिस, जिला प्रशासन व अन्य विभाग इस मामले में कार्रवाई की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं।
#गजट_नोटिफिकेशन
मध्य प्रदेश राज्य में लोकव्यापी रूप में ज्ञात चीनी मांझा सहित नायलान, प्लास्टिक या किसी अन्य सिंथेटिक पदार्थ से बने पतंग उड़ाने वाले धागे एवं अन्य धागे जो जो सिंथेटिक पदार्थ से लेपित हैं और गैर-जैवअवक्रमणीय (अपने आप नष्ट नहीं होने वाला) है, के निर्माण, बिक्री, भंडारण, खरीद, आपूर्ति, आयात और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। केवल ऐसे सूती धागे से पतंग उड़ाने की अनुमति होगी, जो किसी भी तेज या धात्विक कांच के घटकों, चिपकने वाले पदार्थ या धागे को मजबूत करने वाली सामग्रियों से युक्त न हो।
#पांच_वर्ष_की_सजा
इस तरह के मांझे के निर्माण और बिक्री पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के निर्देशों का उल्लंघन है, जिसमें अधिनियम की धारा 15 के अंतर्गत पांच वर्ष का कारावास और एक लाख रुपये तक अर्थदंड हो सकता है।
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