अमेरिकी संसद में H-1B से ग्रीन कार्ड के रास्ते पर रोक का प्रस्ताव, भारतीय पेशेवरों की बढ़ सकती है चिंता
वॉशिंगटन। अमेरिका में एच-1बी वीजा कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और नीतिगत विवाद सामने आया है। रिपब्लिकन सांसद Chip Roy ने अमेरिकी संसद में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें एच-1बी वीजा प्रणाली में व्यापक बदलाव और इसके जरिए ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की मौजूदा व्यवस्था को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है।
**"अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट"** नामक इस प्रस्तावित विधेयक में दावा किया गया है कि एच-1बी कार्यक्रम का वर्षों से दुरुपयोग हुआ है और कई कंपनियों ने अमेरिकी कर्मचारियों के बजाय कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता दी है। विधेयक योग्यता-आधारित चयन, उच्च वेतन मानकों और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की वकालत करता है।
प्रस्ताव में **ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT)** कार्यक्रम को भी समाप्त करने की मांग की गई है। यह कार्यक्रम विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमित अवधि तक अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है।
यदि यह विधेयक भविष्य में कानून का रूप लेता है, तो इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय पेशेवरों और छात्रों पर पड़ सकता है, क्योंकि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक मानी जाती है। वर्तमान में बड़ी संख्या में भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में एच-1बी वीजा के तहत कार्यरत हैं और उनमें से कई ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा सूची में हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि फिलहाल यह केवल एक **प्रस्तावित विधेयक** है। इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा और उसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी आवश्यक होगी। इसलिए तत्काल कोई नीति परिवर्तन लागू नहीं हुआ है।
आप्रवासन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रस्ताव अक्सर राजनीतिक बहस का हिस्सा होते हैं और अंतिम कानून बनने से पहले इनमें बड़े बदलाव संभव हैं। फिर भी, यह प्रस्ताव अमेरिका की आव्रजन नीति को लेकर चल रही बहस और विदेशी पेशेवरों की भूमिका पर बढ़ती राजनीतिक चर्चा को दर्शाता है।
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