टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई समयसीमा, अब चुनाव आयोग करेगा फैसला

Monday, October 26, 2026 - 20:05
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टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई समयसीमा, अब चुनाव आयोग करेगा फैसला

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुटों के बीच विवाद जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 26 अक्टूबर को दोनों पक्षों को चुनाव आयोग के समक्ष दस्तावेज और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया। अदालत ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस गुट को जवाबी हलफनामा और अन्य दस्तावेज जमा करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए अगले 10 दिन मिलेंगे।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी के गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि दूसरे गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष आवश्यक दस्तावेज दाखिल नहीं किए हैं। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के गुट की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि दुर्गा पूजा के दौरान आवश्यक गैर-न्यायिक स्टांप पेपर उपलब्ध नहीं होने के कारण दस्तावेज जमा करने में परेशानी हुई। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को क्रमवार समय देने का निर्देश दिया।

इससे पहले 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को अपनी दलीलें और दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि दोनों पक्षों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर विवाद पर अंतिम निर्णय लिया जाए। सोमवार के आदेश से दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की ओर से दाखिल किए जाने वाले दस्तावेजों की स्वीकार्यता पर सवाल उठा सकते हैं।

विवाद की शुरुआत टीएमसी में टूट और पार्टी के वास्तविक नेतृत्व को लेकर दोनों गुटों के दावों के बाद हुई। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत आयोग ने विवाद का अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का मूल नाम और उसका आरक्षित चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया था।

17 सितंबर को चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न आवंटित किया था। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया। आयोग ने कहा था कि दोनों पक्षों के दावों पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत विस्तृत निर्णय लेना आवश्यक है।

अब दोनों गुटों को निर्धारित समयसीमा में अपने दस्तावेज और जवाब दाखिल करने होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विवाद के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। ऐसे में पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अंतिम अधिकार किसे मिलेगा, यह चुनाव आयोग के फैसले और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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