गुना में प्लॉट नामांतरण पर बाह्य विकास शुल्क का विवाद फिर गरमाया, नगरपालिका के 2016 के संकल्प पर उठे कानूनी सवाल
गुना की पुरानी बस्ती महावीरपुरा में स्थित एक प्लॉट के नामांतरण के दौरान नगरपालिका परिषद के द्वारा बिना कानूनी प्रावधान बताए बाह्य विकास शुल्क मांगे जाने पर मेरे द्वारा की गई पोस्ट के बाद नगरपालिका की ओर से मीडिया के साथियों को यह पत्र जारी किया गया है।
इस पत्र के द्वारा परिषद के साधारण सम्मेलन के ठहराव क्रमांक 157 दिनांक 18.03.2016 से पारित संकल्प की छायाप्रति उपलब्ध कराई गई है। जिसमें हक हस्तांतरण (नामांतरण) के संबंध में शुल्क वृद्धि का संकल्प सर्वसम्मति से पारित करने का लेख है।
यह संकल्प 2016 का है, इसके बाद मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021 लागू हो चुके हैं। जिसमें सारे प्रावधान स्पष्ट हैं और पूर्व की भांति बाह्य विकास शुल्क कॉलोनाइजर से लिए जाने का प्रावधान है।
ऐसे में मूल प्रश्न अभी भी विद्धमान है कि यह संकल्प भी किस अधिनियम, नियम, उपनियम, शासनादेश या कानून के तहत पारित किया गया। क्योंकि केवल यह प्रस्ताव अपने आप में यह सिद्ध नहीं करता कि हर प्लॉट के नामांतरण के समय बाह्य विकास शुल्क वसूलना वैधानिक है। यह भी सिद्ध नहीं होता कि किसी प्लॉट के मालिक से यह शुल्क लिया जाएगा।
सबसे महत्वपूर्ण #कानूनी_सवाल यह है कि नगरपालिका परिषद कोई भी शुल्क केवल परिषद के प्रस्ताव से नहीं लगा सकती। उसके लिए किसी अधिनियम, नियम, वैध शासन आदेश या अन्य सक्षम वैधानिक प्रावधान में उसे शुल्क लगाने का अधिकार प्राप्त होना आवश्यक है। संविधान के अनुसार निर्मित नियम कानूनों का पालन करना अनिवार्य है। यह मनमानी व्यवस्था नहीं है।
नगरपालिका ने मीडिया को प्रेषित इस प्रस्ताव में #बाह्य_विकास_शुल्क को नामांतरण शुल्कों की तालिका में शामिल किया है, इससे यह जरूर पता चलता है कि नगरपालिका परिषद ने नामांतरण के समय इसे वसूलने का निर्णय लिया था। लेकिन ऐसा निर्णय किस कानूनी आधार पर लिया था यह नहीं बताया। अब नियम 2021 लागू होने के बाद इसकी क्या वैधानिकता है?
इससे संकल्प से यह स्वतः साबित नहीं होता कि "नामांतरण कराने वाले प्रत्येक व्यक्ति से, प्रत्येक प्लॉट पर, बिना यह देखे कि वह कॉलोनी/विकास योजना का हिस्सा है या नहीं, बाह्य विकास शुल्क लिया जा सकता है।"
ऐसे में ये प्रश्न बरकरार हैं कि,
1. परिषद द्वारा पारित इस संकल्प का वैधानिक आधार क्या है। अर्थात् यह किस अधिनियम, नियम, उपनियम, शासनादेश या कानून के तहत पारित किया था?
2. इस संकल्प के आधार पर महावीर पूरा जैसी पुरानी बस्ती में स्थित प्लॉट के धारक से जो कॉलोनाइजर नहीं है, प्लॉट के नामांतरण के समय बाह्य विकास शुल्क किस वैधानिक आधार और शासनादेश के अनुसार मांगा जा रहा है?
3. मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961, मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021के प्रावधान में कहां लिखा है कि पुरानी बस्ती में स्थित प्लॉट के नामांतरण के समय प्लॉट मालिक से बाह्य विकास शुल्क मांगा जाएगा?
बता दें कि, #सुप्रीम_कोर्ट ने सिविल अपील नम्बर 2511/2011 एवं 2512/2011 "राघोगढ़ नगरपालिका एवं अन्य बनाम नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड एवं अन्य" मामले में न्यायमूर्ति एन.वी. रमना और न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नज़ीर की बेंच ने 30 जनवरी 2018 को निर्णय देते हुए कहा है कि
म.प्र. शासन आदेश के तहत बाह्य विकास शुल्क हाउसिंग कंस्ट्रक्शन सोसायटी, कॉलोनाइजर और व्यक्तियों द्वारा कॉलोनी विकसित करने की परिस्थितियों में लागू होगा। NFL और GAIL ने अपने कर्मचारियों के लिए आवास विकसित किए थे; वे कॉलोनाइजर या हाउसिंग सोसायटी नहीं थे। इसलिए उनसे बाह्य विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता।
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