मैसूरु दशहरा: धार्मिक रस्मों में बाधा से नाराज हुईं प्रमोदा देवी, सरकार को दिए सुझाव
मैसूरु। मैसूरु के पूर्व शाही परिवार की प्रमुख प्रमोदा देवी वाडियार ने दशहरा 2026 के आयोजन में अव्यवस्थाओं और सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और महल परिसर में आवाजाही से जुड़ी समस्याओं के कारण परिवार की पारंपरिक धार्मिक रस्मों में बाधा आई। उन्होंने सरकार से व्यवस्थाओं में सुधार करने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
25 अक्टूबर को जारी बयान में प्रमोदा देवी ने कहा कि महल पुलिस, जिला पुलिस, कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस और अन्य जिलों से आए पुलिसकर्मियों के बीच समन्वय की कमी के कारण हर साल समस्याएं सामने आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गोल्डन अंबारी के पास अनधिकृत लोगों के जुटने और तस्वीरें खिंचवाने से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। उनके मुताबिक, वैध ड्यूटी पास रखने वाले उनके प्रतिनिधियों के साथ भी कथित तौर पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस वाहनों और बैरिकेडिंग के कारण शाही परिवार की निजी पार्किंग प्रभावित हुई, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों में परेशानी हुई।
प्रमोदा देवी ने पारंपरिक वज्रमुष्टि कुश्ती को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह दावा सही नहीं है कि इस आयोजन को पहली बार बंद किया गया है। उनके अनुसार, 1970 और 1980 के दशक में भी कुछ अवसरों पर कुश्ती नहीं हुई थी और वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण इसका आयोजन नहीं हो सका था। उन्होंने कहा कि वाडियार परिवार लंबे समय से इस पारंपरिक खेल को संरक्षण देता रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस बार गोल्डन अंबारी ले जाने वाले हाथी के बारे में परिवार को अंतिम समय तक जानकारी नहीं मिली। उनके मुताबिक, 45 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ और जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्हें कार्यक्रम से पांच दिन पहले वन विभाग के अधिकारी से संपर्क करना पड़ा।
प्रमोदा देवी ने सरकार को सुझाव दिया कि दशहरा के पहले से सातवें दिन तक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जबकि आयुध पूजा और विजयदशमी के दिन महल परिसर को बाहरी गतिविधियों से मुक्त रखा जाए, ताकि परिवार अपने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के कर सके। उन्होंने श्री चामुंडेश्वरी अम्मनवरु की अंबारी यात्रा विजयदशमी के बजाय चामुंडी पहाड़ी पर होने वाले रथोत्सव के दिन शाम को महल से बन्नीमंटप तक निकालने का प्रस्ताव भी रखा।
इस विवाद पर कर्नाटक सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा कि महल बोर्ड और महल की जमीन सरकार के अधीन हैं, लेकिन शाही परिवार को उचित सम्मान दिया जाता है। उन्होंने शिकायतों पर विचार करने और परिवार से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही। अब इस मामले में सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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