E20 कार्यक्रम पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, 'इसे एक्सपेरिमेंट बताने वाली खबरें पूरी तरह गलत'
केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) कार्यक्रम को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि इसे 'चल रहा एक्सपेरिमेंट' बताना पूरी तरह गलत और भ्रामक है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में प्रसारित खबरों का सुप्रीम कोर्ट की वास्तविक कार्यवाही से कोई संबंध नहीं है।
महान्यायवादी (Attorney General) के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि कुछ मीडिया चैनलों और वेबसाइट्स ने यह दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने E20 कार्यक्रम को अभी भी एक प्रयोग बताया है, जिसका असर अगले वर्ष स्पष्ट होगा। कार्यालय ने इन रिपोर्टों को पूरी तरह असत्य करार देते हुए कहा कि अदालत में ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया।
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 कार्यक्रम देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह कार्यक्रम तय नीति और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर लागू किया जा रहा है, न कि किसी प्रयोग के तौर पर।
सरकार ने मीडिया संस्थानों से न्यायालय की कार्यवाही से जुड़ी खबरों के प्रकाशन में तथ्यों की पुष्टि करने और भ्रामक जानकारी प्रसारित करने से बचने की अपील भी की है।
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