लखनऊ में 400 से ज्यादा पुलिस चौकियों पर विज्ञापन, नगर निगम के राजस्व पर सवाल
लखनऊ। शहर में नगर निगम की अनुमति के बिना विज्ञापन लगाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस चौकियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़े-बड़े होर्डिंग और विज्ञापन बोर्ड लगाए गए हैं। सवाल उठ रहा है कि जब विज्ञापन लगाने के लिए नगर निगम की अनुमति और निर्धारित शुल्क जरूरी है, तो कई स्थानों पर नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 400 से अधिक पुलिस चौकियों पर विज्ञापन बोर्ड लगे हैं, जबकि नगर निगम को हर साल करीब तीन करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शहर की कई पुलिस चौकियों पर निजी कंपनियों के विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं। इनमें कोचिंग संस्थानों, ज्वेलरी दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बोर्ड शामिल हैं। इन विज्ञापनों को लगाने के लिए संबंधित एजेंसियों ने नगर निगम से अनुमति ली है या नहीं, इस पर सवाल उठाए गए हैं। यदि विज्ञापन बिना अनुमति लगाए गए हैं, तो नगर निगम के राजस्व और नियमों के पालन की जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

नगर निगम के नियमों के मुताबिक, सार्वजनिक स्थानों और सड़क से दिखाई देने वाली इमारतों पर विज्ञापन लगाने के लिए निर्धारित अनुमति लेना जरूरी है। अनुमति के बिना लगाए गए विज्ञापनों पर कार्रवाई की जा सकती है। वर्ष 2026 में उत्तर प्रदेश में विज्ञापन और होर्डिंग को नियंत्रित करने के लिए नई नियमावली भी लाई गई है। इसका उद्देश्य विज्ञापन लगाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, अवैध होर्डिंग पर रोक लगाना और शुल्क की वसूली सुनिश्चित करना है।
इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि पुलिस चौकियों पर विज्ञापन लगाने की अनुमति किस विभाग या अधिकारी ने दी। यदि किसी सरकारी परिसर का इस्तेमाल व्यावसायिक प्रचार के लिए किया जा रहा है, तो उसके लिए लागू नियमों और अनुमति की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही, नगर निगम को यह भी जांचना होगा कि संबंधित विज्ञापन एजेंसियों ने निर्धारित शुल्क जमा किया है या नहीं।
रिपोर्ट में नगर निगम के प्रचार विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। यदि इतने बड़े पैमाने पर विज्ञापन बोर्ड लगे हैं, तो उनका सर्वेक्षण, अनुमति संबंधी रिकॉर्ड और शुल्क वसूली की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने विज्ञापन वैध हैं और किन मामलों में कार्रवाई की जरूरत है।
नगर निगम के प्रचार विभाग की ओर से नई विज्ञापन नियमावली के तहत व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की बात कही गई है। हालांकि, 400 से अधिक पुलिस चौकियों पर लगे विज्ञापनों और करीब तीन करोड़ रुपये के कथित राजस्व नुकसान के आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल, इस मामले में मुख्य सवाल यही है कि विज्ञापन लगाने की अनुमति, शुल्क वसूली और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है तथा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई कब होगी।
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