सिविल जज भर्ती 2022 पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जताया खेद, अंतरिम आदेश निरस्त; 4 मई 2026 को होगी अंतिम बहस
जबलपुर (आरएनआई) मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती परीक्षा 2022 को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भर्ती प्रक्रिया में देरी पर खेद जताया। अदालत ने कहा कि प्रदेश में सिविल जज भर्ती चार वर्ष से लंबित है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने प्रति वर्ष समय पर भर्ती करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ** की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की तेरहवीं सुनवाई की। सुनवाई के दौरान लाइव स्ट्रीमिंग बंद रखी गई। कोर्ट ने पूर्व में पारित प्रभावी अंतरिम आदेशों को निरस्त करते हुए मामले को **04 मई 2026** को अंतिम बहस के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। साथ ही परीक्षा सेल को आगामी भर्तियां नियमित रूप से करने के निर्देश भी दिए गए।
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### क्या है मामला?
एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस नामक संस्था ने जनहित याचिका क्रमांक 40833/2024 के माध्यम से 17/11/2023 के विज्ञापन तथा भर्ती नियम 1994 में 23/06/2023 को किए गए संशोधन (नियम 5) की संवैधानिकता को चुनौती दी है।
याचिका में तर्क दिया गया कि संशोधित नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 234 और 335 से असंगत हैं। मुख्य परीक्षा में आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के लिए 50% एग्रीगेट निर्धारित किए जाने तथा विषयवार क्वालीफाइंग अंकों को लेकर आपत्ति जताई गई। हिंदी और अंग्रेजी पाठ में असंगति का भी मुद्दा उठाया गया।
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### बैकलॉग पदों पर विवाद
याचिकाकर्ता ने अनारक्षित वर्ग के 17 पदों को “बैकलॉग” दर्शाए जाने पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये पद पिछली भर्ती में रिक्त रहे थे, जिन्हें कैरी फॉरवर्ड माना जाएगा, न कि बैकलॉग।
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### याचिकाकर्ता के प्रमुख तर्क
* त्रुटिपूर्ण नियमों के कारण अनुसूचित जनजाति वर्ग का एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सका।
* भर्ती प्रक्रिया लोक सेवा आयोग के माध्यम से कराई जाए।
* अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक न करना पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह है।
* अनुच्छेद 234 के तहत लोक सेवा आयोग से परामर्श के बिना नियम बनाना असंवैधानिक है।
* आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में जानबूझकर कम अंक दिए जाने का आरोप।
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### कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने बताया कि एससी/एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अपने खर्च पर कोचिंग प्रारंभ की गई है, जिसमें एक हजार से अधिक पंजीयन हो चुके हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षित वर्ग के रिक्त पद सामान्य वर्ग से नहीं भरे जाएंगे।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने से इनकार करते हुए गुण-दोष के आधार पर निर्णय की मांग की। इस पर खंडपीठ ने सभी प्रभावी अंतरिम आदेश निरस्त कर मामले को अंतिम सुनवाई हेतु नियत कर दिया।
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अब 4 मई 2026 को होने वाली अंतिम बहस के बाद ही भर्ती प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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