विधानसभा में नगरीय विकास बजट पर जयवर्धन सिंह का सरकार से सवाल – “सिर्फ 5% बजट से कैसे होगा शहरों का विकास?”
भोपाल (आरएनआई) मध्यप्रदेश विधानसभा में मांग संख्या 22 (नगरीय विकास एवं आवास विभाग) पर चर्चा के दौरान राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और बजट प्रावधानों पर गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपये के कुल बजट में से नगरीय विकास विभाग को मात्र 20–22 हजार करोड़ रुपये, यानी लगभग 5 प्रतिशत राशि आवंटित की गई है, जो प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए अत्यंत अपर्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब शहरों की आबादी और जरूरतें बढ़ रही हैं, तब संसाधनों में कटौती समझ से परे है।
श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर आ रहे हैं। ऐसे में कम से कम 10 प्रतिशत बजट नगरीय विकास के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए था।
उन्होंने विभिन्न मदों में की गई बजट कटौती पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि संरक्षण एवं निर्माण कार्यों की राशि 220 करोड़ से घटाकर 100 करोड़ कर दी गई, मूलभूत सुविधाओं के लिए आवंटन 1617 करोड़ से घटाकर 1057 करोड़ कर दिया गया, तथा मलजल योजनाओं और जल आपूर्ति-सफाई जैसे संवेदनशील विषयों पर भी अत्यंत सीमित प्रावधान किए गए हैं।
हाल की जल प्रदूषण घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अटल मिशन फॉर रीजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत योजना) के अंतर्गत पिछले 10–12 वर्षों में हुए कार्यों की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। जिन ठेकेदारों ने लापरवाही या अनियमितता की है, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी आवश्यक है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (बीएलसी) के नियमों में किए गए बदलाव पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रजिस्ट्री अनिवार्य किए जाने से अत्यंत गरीब वर्ग नए आवास के लिए पात्र नहीं बन पा रहे हैं। सरकार को इस नियम में शिथिलता लानी चाहिए ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिल सके।
स्वच्छता के विषय पर उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत इंदौर ने लगातार देश में पहला स्थान प्राप्त कर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत किया है। “इंदौर मॉडल” को प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में लागू किया जाना चाहिए, ताकि समान रूप से स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था विकसित हो सके।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं—World Bank, Asian Development Bank तथा KfW—के सहयोग से मॉडल टाउन विकसित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधारभूत ढांचा तैयार किया जा सके।
मेट्रो परियोजनाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भोपाल और इंदौर में मेट्रो तभी सफल होगी जब उसे बस, ऑटो और अन्य सार्वजनिक परिवहन से प्रभावी रूप से जोड़ा जाएगा तथा एकीकृत कॉमन कार्ड प्रणाली लागू की जाएगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रदेश के प्रत्येक नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को अपनी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के लिए शहरों और आसपास उपलब्ध शासकीय भूमि का सर्वे कराया जाए। यदि माननीय मंत्री प्रत्येक सीएमओ और आयुक्त को निर्देश दें कि ऐसी शासकीय भूमि चिन्हित कर नियमानुसार नीलामी की जाए, तो स्थानीय निकायों की आय में वृद्धि होगी और वे बेहतर आधारभूत सुविधाएँ प्रदान कर सकेंगे।
भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हुए श्री सिंह ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भोपाल नगर निगम की एक नई बिल्डिंग का प्रारंभिक टेंडर 22 करोड़ रुपये का था, जिसे बाद में तीन बार संशोधित कर लगभग 72 करोड़ रुपये तक पहुँचा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार टेंडर राशि बढ़ाकर ठेकेदारों को लाभ पहुँचाने की प्रवृत्ति के कारण सार्वजनिक धन का सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नल-जल योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत 522 करोड़ रुपये में से केवल लगभग 270 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। शेष राशि खर्च न हो पाने का कारण ठेकेदारों की प्रभावी मॉनिटरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी है। इसका सीधा प्रभाव प्रदेश के शहरी नागरिकों पर पड़ रहा है, जो मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान हो रहे हैं।
अंत में श्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि नगरीय विकास विभाग केवल एक विभाग नहीं, बल्कि प्रदेश के 400 से अधिक नगरीय निकायों के समन्वय का मंत्रालय है। ऐसे में सरकार को इसे अधिक संसाधन, पारदर्शिता और प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने माननीय मंत्री से आग्रह किया कि उठाए गए सभी बिंदुओं पर विस्तार से उत्तर दें और आगामी बजट में आवश्यक सुधार शामिल करें, ताकि प्रदेश के शहरों का समग्र, पारदर्शी और सुरक्षित विकास सुनिश्चित हो सके।
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