रमेश का दावा: आठ विपक्षी राज्यों ने जीएसटी घटाने का किया समर्थन, उपभोक्ताओं को होगा फायदा

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने जीएसटी की दरों में कटौती और उनके संख्या में कमी के प्रस्ताव का समर्थन किया है। इन राज्यों ने उपभोक्ताओं तक लाभ पहुंचाने के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की है और कटौती से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए पांच साल तक मुआवजे की भी मांग की है। 

Saturday, August 30, 2025 - 15:02
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रमेश का दावा: आठ विपक्षी राज्यों ने जीएसटी घटाने का किया समर्थन, उपभोक्ताओं को होगा फायदा

नई दिल्ली (आरएनआई) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को बताया कि विपक्ष शासित आठ राज्यों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में बदलाव को समर्थन दिया है। इन राज्यों ने जीएसटी की अलग-अलग दरों को कम करने और आम उपभोग की चीजों पर लगने वाली दरों को घटाने की मांग का समर्थन किया है। साथ ही, इन राज्यों ने यह भी मांग की है कि एक ऐसी प्रणाली बनाई जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इन दरों में कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

रमेश के मुताबिक, इन आठ विपक्ष शासित राज्यों ने यह भी मांग की है कि जब दरों में कटौती होगी, जिससे राज्यों की आय पर असर पड़ेगा, तो उसकी भरपाई के लिए सभी राज्यों को पांच साल तक मुआवजा दिया जाए। इस मुआवजे की गणना के लिए 2024-25 को आधार वर्ष माना जाए। उन्होंने कहा कि 'विलासिता की वस्तुओं' (जैसे तंबाकू, शराब आदि) और लग्जरी वस्तुओं पर प्रस्तावित 40 फीसदी से ऊपर जो अतिरिक्त टैक्स लगेगा, उसका पूरा पैसा राज्यों को दिया जाए।

कांग्रेस नेता ने एक्स पर कहा, आठ विपक्ष शासित राज्यों कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने जीएसटी की दरों को घटाने और आम जनता द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं पर दरें कम करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों ने यह भी कहा है कि दरों में कटौती से उपभोक्ताओं को सीधा फायदा मिले, इसके लिए एक ठोस व्यवस्था बनाई जाए। रमेश ने कहा कि इन राज्यों की यह भी मांग है कि दरों में कटौती से जो राजस्व घाटा होगा, उसकी भरपाई के लिए सभी राज्यों को पांच वर्षों तक मुआवजा दिया जाए, और इसके लिए 2024-25 को आधार वर्ष माना जाए।

इन आठ राज्यों ने यह भी कहा है कि 'विलासिता की वस्तुओं' और लग्जरी सामान पर जो अतिरिक्त टैक्स 40 फीसदी से ऊपर लगेगा, उसे पूरी तरह राज्यों को दिया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपनी कुल राजस्व का करीब 17-18 फीसदी अलग-अलग कर (सेस) के जरिए प्राप्त करता है, जिसे राज्यों के साथ साझा नहीं किया जाता।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इन राज्यों की मांगें पूरी तरह से जायज हैं और इन्हें खुद केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत काम करने वाली राष्ट्रीय लोक वित्त और वित्तीय संस्थान (एनआईपीएफपी) के हालिया शोध पत्रों का समर्थन भी मिला है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की मांग कर रही है, जो केवल दरों को कम ही नहीं करे, बल्कि जीएसटी की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाए, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के लिए। रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि सभी राज्यों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाए।

उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि अगले हफ्ते होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक केवल खबरों में आने वाला दिखावा नहीं होगी, जैसा कि मोदी सरकार अक्सर करती है, बल्कि इसमें सही मायनों में सहकारी संघवाद को आगे बढ़ाया जाएगा। 

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