मैसेजिंग ऐप्स पर सख्ती टली: WhatsApp-Telegram यूजर्स को राहत, सिम-बाइंडिंग नियम 31 दिसंबर तक स्थगित
नई दिल्ली (आरएनआई)। केंद्र सरकार ने मोबाइल मैसेजिंग ऐप्स पर प्रस्तावित सिम-बाइंडिंग नियम को फिलहाल टालते हुए इसकी समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। इस फैसले से WhatsApp, Telegram और Signal जैसे प्लेटफॉर्म के करोड़ों यूजर्स को बड़ी राहत मिली है। पहले यह नियम जल्द लागू होने वाला था, लेकिन कंपनियों और यूजर्स की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इसे फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया।
सरल शब्दों में सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि कोई भी मैसेजिंग ऐप तभी काम करेगा, जब मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड मौजूद होगा। यदि सिम हटा दिया जाए या बंद हो जाए, तो ऐप का इस्तेमाल भी प्रभावित हो सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल और संदिग्ध मैसेज पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
इसके साथ ही, सरकार ने वेब वर्जन को लेकर भी नियमों में बदलाव किया है। पहले प्रस्ताव था कि व्हाट्सएप वेब या टेलीग्राम वेब जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स को हर छह घंटे में लॉगआउट कर दिया जाएगा, लेकिन अब इसे एआई आधारित जोखिम आकलन से जोड़ा गया है। यानी केवल संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर ही यूजर को लॉगआउट किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, कई साइबर अपराधी सिम हटाने या विदेश ले जाने के बाद भी ऐप्स का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम देते हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’, निवेश धोखाधड़ी और फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी जैसे मामलों में यह खामी सामने आई है। सिम-बाइंडिंग लागू होने पर हर अकाउंट को केवाईसी वाले सिम से जोड़ना अनिवार्य होगा, जिससे अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो सकेगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध भी हो रहा है। Broadband India Forum (बीआईएफ) ने इसे मौजूदा कानून के दायरे से बाहर बताते हुए असंवैधानिक करार दिया है। वहीं एक सर्वे में सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत लोगों को आशंका है कि इस नियम से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज प्रभावित हो सकता है, खासकर उन परिवारों में जहां एक ही सिम या डिवाइस कई लोग साझा करते हैं।
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