छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन पर उर्दू नाम का विरोध, भाजपा विधायक ने की बोर्ड से हटाने की मांग
मुंबई (आरएनआई)। महाराष्ट्र में हाल ही में बदले गए छत्रपति संभाजीनगर रेलवे स्टेशन के नाम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक संजय केनेकर ने मंगलवार को स्टेशन के बोर्ड पर उर्दू लिपि में लिखे नाम को हटाने की मांग की है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नाम परिवर्तन की अधिसूचना में उर्दू भाषा का कोई उल्लेख नहीं है, तो फिर बोर्ड पर उर्दू में नाम क्यों लिखा गया है।
अधिसूचना में उर्दू भाषा का जिक्र नहीं
महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य संजय केनेकर ने कहा, “अधिसूचना में केवल हिंदी, अंग्रेजी और मराठी भाषाओं का उल्लेख किया गया है। जब अधिसूचना में उर्दू का नाम ही नहीं है, तो बोर्ड पर यह लिपि क्यों जोड़ी गई? उर्दू में लिखा नाम देखकर मैं हैरान रह गया।”
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “क्या रेलवे अधिकारी मुगलों के साथ काम कर रहे हैं? मैंने संबंधित अधिकारियों को फोन कर तत्काल यह नाम हटाने के लिए कहा है।”
25 अक्तूबर को हुआ था नाम परिवर्तन का ऐलान
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने तीन साल पहले औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में रेलवे ने 25 अक्तूबर को स्टेशन के नए नाम की अधिसूचना जारी की, जिसके तहत अब स्टेशन का नया कोड CPSN होगा। यह स्टेशन दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के अंतर्गत आता है।
राजनीतिक रंग में रंगा भाषाई विवाद
उर्दू लिपि में नाम लिखे जाने का यह विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा विधायक केनेकर का कहना है कि यह “सरकारी आदेशों का उल्लंघन” है, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम “भाषाई असहिष्णुता” को बढ़ावा देता है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, स्टेशन बोर्ड पर नाम क्षेत्रीय भाषाओं में एकरूपता के सिद्धांत के अनुसार लिखा गया है, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद विभाग इस मामले की पुनः समीक्षा कर सकता है।
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