‘हैलो ग्रीनलैंड’ पोस्ट से फिर बढ़ा विवाद, ट्रंप की रणनीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने एक बार फिर Greenland में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड की राजधानी Nuuk की स्काईलाइन के सामने अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “हैलो ग्रीनलैंड!” इस पोस्ट के बाद वहां अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी और रणनीतिक दखल को लेकर विरोध और तेज हो गया है।
ग्रीनलैंड में हाल ही में नए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास भवन की शुरुआत को लेकर स्थानीय लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी नुक की सड़कों पर सैकड़ों लोग उतरे और अमेरिका विरोधी नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था, “हमें आपका पैसा नहीं चाहिए” और “ग्रीनलैंडवासी मैगा ट्रोजन हॉर्स को पहचानते हैं।” कई जगह “गो अवे” यानी “यहां से चले जाओ” के नारे भी लगाए गए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड में लगातार प्रभाव बढ़ा रहा है। नए वाणिज्य दूतावास को भी कई लोग राजनयिक केंद्र के बजाय अमेरिकी दखल का प्रतीक मान रहे हैं।
इस बीच अमेरिका के विशेष दूत और लुइसियाना के अटॉर्नी जनरल Jeff Landry ने ग्रीनलैंड दौरे के दौरान कई राजनीतिक और कारोबारी नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच सुरक्षा, आर्थिक विकास और आर्कटिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों पर चर्चा हुई है।
जेफ लैंड्री ने दावा किया कि ग्रीनलैंड भविष्य में वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार यह क्षेत्र प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा संभव होता है तो इससे Strait of Hormuz पर निर्भरता और दबाव कम हो सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी।
हालांकि ग्रीनलैंड में बढ़ते अमेरिकी प्रभाव को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में संसाधनों और सामरिक महत्व को लेकर अमेरिका, रूस और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है, और ग्रीनलैंड इसी वैश्विक रणनीतिक संघर्ष का अहम केंद्र बनता जा रहा है।
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