हाथरस में फिर गरमाया अवैध सट्टे का मुद्दा, पुराने कारोबारी चतुरा के नाम की चर्चा
हाथरस (आरएनआई)। जनपद में एक बार फिर अवैध सट्टे के कारोबार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सट्टे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और इस कारोबार से जुड़े लोगों द्वारा कथित रूप से नए-नए सट्टा सेवा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। चर्चाओं के केंद्र में लंबे समय से सट्टे के कारोबार से जुड़ा नाम बताए जाने वाले सी.बी. गुप्ता उर्फ चतुरा का नाम भी सामने आ रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विष्णुपुरी क्षेत्र स्थित एक कथित सट्टा सेवा केंद्र पर प्रतिदिन लोगों की आवाजाही बनी रहती है। आरोप है कि अब यह कारोबार सीमित दायरे से निकलकर संगठित स्वरूप ले चुका है। लोगों का कहना है कि दिन में कई बार अलग-अलग नामों से सट्टा संचालित किया जाता है, जिनमें गली, दिसावर और फरीदाबाद जैसे नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं। आरोप है कि बड़ी संख्या में युवा एवं मजदूर वर्ग इस अवैध कारोबार की चपेट में आ रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इसके सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणाम और गंभीर हो सकते हैं। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है।जानकारों के अनुसार चतुरा का नाम पूर्व में भी सट्टे के मामलों को लेकर चर्चाओं में रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे के कार्यकाल में सट्टे के कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान उसके विरुद्ध कार्रवाई भी की गई थी। ऐसे में एक बार फिर उसके नाम को लेकर उठ रही चर्चाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जनपद में अवैध सट्टे का कारोबार संचालित हो रहा है तो उसके पीछे कार्य कर रहे पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका मानना है कि केवल छोटे स्तर के सटोरियों पर कार्रवाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके मूल संचालकों और संरक्षकों तक पहुंचना आवश्यक है।शहर में यह भी चर्चा है कि सट्टे के कारोबार को लेकर कई बार शिकायतें संबंधित विभागों तक पहुंची हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। वहीं, कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि इस कारोबार को कथित संरक्षण प्राप्त है। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित सभी व्यक्तियों एवं जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।प्रदेश सरकार द्वारा अपराध और अवैध कारोबार के विरुद्ध लगातार सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद जनपद में उठ रहे इन सवालों ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करता है।
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