कागजी सत्यापन और खाता अपडेट की विसंगतियों की आड़ में शासन-प्रशासन क्यों है मौन? 1850 प्रेरकों का भविष्य अधर में
हरदोई। (आरएनआई) 30 जुलाई 2026 साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत देश और प्रदेश को साक्षर बनाने में अपनी जवानी खपाने वाले शिक्षा प्रेरकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। वर्षों से अपने हक के अवशेष बकाया मानदेय के लिए भटक रहे शिक्षा प्रेरकों ने अपनी समस्याओं को लेकर ऐतिहासिक गांधी भवन में एक बेहद महत्वपूर्ण चिंतन-मंथन बैठक का आयोजन किया। बैठक में मौजूद वक्ताओं ने शासन और प्रशासन की घोर अनदेखी और रहस्यमयी चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए। बैठक में आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रेरक प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाई है। पल्स पोलियो अभियान से लेकर जनधन खातों और राशन कार्ड के सत्यापन तक, शासन के हर निर्देश को धरातल पर सच साबित किया। इसके बाद, सभी कार्यों की वास्तविकता की जांच कराके और बकायदा सत्यापित दस्तावेज 31 मार्च 2018 को ही संबंधित कार्यालयों में जमा करा दिए गए थे। इसके बावजूद, आज इतने वर्षों बाद भी सिर्फ 'सत्यापन' और 'खाता अपडेट सूची में विसंगति' का बहाना बनाकर भुगतान को लगातार टाला जा रहा है। 1850 प्रेरकों का गणित और शासन की उदासीनता आंकड़ों को सामने रखते हुए प्रेरकों ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2018 को जब योजना बंद हुई, तब 1850 शिक्षा प्रेरक पूरी तरह सक्रिय रूप से संचालन में थे। इस मिशन के तहत कुल 2202 पदों का सृजन होना था, जिसमें से लगभग 352 पद रिक्त रह गए थे। जो प्रेरक अंतिम दिन तक विषम परिस्थितियों में भी काम करते रहे, उनके प्रति सरकार आख़िर इतनी गंभीर क्यों नहीं है? "गांधी भवन के मंच से शिक्षा प्रेरकों ने अत्यंत भावुक और तार्किक अपील करते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में वे पाई-पाई को मोहताज हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में प्रशासन से कहा:"अगर शासन-प्रशासन को लगता है कि हमारी मांगें बहुत ज़्यादा हैं, तो हमें ब्याज मत दीजिए। लेकिन कम से कम हमारा बकाया 10 माह का जो मूलधन (एरियर) बनता है, वही स्पष्ट रूप से हमारे खातों में डाल दीजिए। कागजों की आड़ में हमारे हक को दबाना बंद करें। इस गंभीर चिंतन बैठक के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों और शासन स्तर पर छाई खामोशी प्रेरकों के घावों पर नमक छिड़कने जैसी है। जब सारे दस्तावेज और सत्यापन रिपोर्ट कार्यालयों में धूल फांक रहे हैं, तो बैंक खातों को अपडेट करने में इतनी विसंगतियां क्यों आ रही हैं? प्रेरकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस विसंगति को दूर कर उनके बकाए का स्पष्टीकरण और भुगतान नहीं किया गया, तो धरातल पर काम करने वाला यह वर्ग सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
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