सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सार्वजनिक स्थान पर इस्तेमाल न होने पर वाहन पर टैक्स नहीं लगेगा

शीर्ष न्यायालय ने 29 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, 'अगर किसी मोटर वाहन का उपयोग 'सार्वजनिक स्थान' पर नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का लाभ नहीं ले रहा है। इसलिए उस पर ऐसी अवधि के लिए मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।'

Sunday, August 31, 2025 - 15:16
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सार्वजनिक स्थान पर इस्तेमाल न होने पर वाहन पर टैक्स नहीं लगेगा

नई दिल्ली (आरएनआई) सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि कोई वाहन सार्वजनिक स्थान पर उपयोग में नहीं आता है, तो उसके मालिक पर उस अवधि के लिए मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के दिसंबर 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली एक अपील पर अपना फैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा, 'मोटर वाहन कर प्रतिपूरक प्रकृति का होता है। मोटर वाहन कर लगाने का औचित्य यह है कि जो व्यक्ति सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जैसे सड़क, राजमार्ग आदि का इस्तेमाल करता है तो उसे इसका भुगतान करना होगा।' 

शीर्ष न्यायालय ने 29 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, 'अगर किसी मोटर वाहन का उपयोग 'सार्वजनिक स्थान' पर नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का लाभ नहीं ले रहा है। इसलिए उस पर ऐसी अवधि के लिए मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।' न्यायालय ने कहा कि आंध्र प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1963 की धारा 3 के तहत कर लगाने का प्रावधान है और यह राज्य सरकार को मोटर वाहनों पर कर लगाने का अधिकार देती है।

पीठ ने 1985 से रसद सहायता देने के व्यवसाय में लगी एक फर्म द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया। पीठ ने कहा कि फर्म को नवंबर 2020 में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की एक कॉर्पोरेट इकाई, विशाखापत्तनम स्टील प्लांट, आंध्र प्रदेश के केंद्रीय डिस्पैच यार्ड में लौह और इस्पात सामग्री के संचालन और भंडारण के लिए एक अनुबंध दिया गया था। पीठ ने कहा कि कंपनी ने केंद्रीय डिस्पैच यार्ड परिसर में 36 मोटर वाहन चलाए थे। कंपनी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि केंद्रीय डिस्पैच यार्ड चारदीवारी से घिरा हुआ है और प्रवेश-निकास उन द्वारों से होता है जहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान तैनात हैं और किसी भी आम नागरिक को वहां जाने का अधिकार नहीं है।

जब कंपनी के वाहन केंद्रीय डिस्पैच यार्ड परिसर में इस्तेमाल किए जा रहे थे, उस अवधि में कंपनी ने आंध्र प्रदेश प्राधिकरण से मोटर वाहन कर के भुगतान से छूट की अपील की। बाद में मामला उच्च न्यायालय पहुंचा जहां से कंपनी को राहत देते हुए राज्य प्राधिकरण को कंपनी को 22,71,700 रुपये वापस करने का निर्देश दिया। इस फैसले के खिलाफ प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा है। 

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