श्रीकाकुलम में दूषित पानी से स्वास्थ्य संकट, एक की मौत, 70 से अधिक बीमार; प्रशासन और सरकार अलर्ट
श्रीकाकुलम (आरएनआई)। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में दूषित पेयजल के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया है। श्रीकाकुलम कस्बे की दम्मला वीड़ी कॉलोनी में दूषित पानी पीने से एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 70 से अधिक लोग बीमार होकर विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को कॉलोनी के कई निवासियों में अचानक दस्त, उल्टी और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। शुरुआत में इसे सामान्य बीमारी समझा गया, लेकिन मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल जांच शुरू की। कुछ ही दिनों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई और मेडिकल टीमों को तैनात किया गया।
जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के. अनीता ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच की जा रही है। हल्के लक्षण वाले लोगों को मौके पर ही दवाएं दी जा रही हैं, जबकि गंभीर मरीजों को सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, अधिकांश मरीजों में जलजनित संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। संक्रमण के सटीक कारणों की पुष्टि पानी की लैब जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी।
एहतियात के तौर पर प्रशासन ने दम्मला वीड़ी कॉलोनी की पूरी पेयजल पाइपलाइन बंद कर दी है। फिलहाल टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी की आपूर्ति की जा रही है। साथ ही पानी के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। इलाके में स्वच्छता अभियान तेज कर दिया गया है, नालियों की सफाई, क्लोरीन छिड़काव और जल स्रोतों की जांच की जा रही है ताकि संक्रमण के स्रोत का जल्द पता लगाया जा सके।
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने स्वास्थ्य अधिकारियों और जिला प्रशासन के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रभावित लोगों को तत्काल और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए तथा जल आपूर्ति व्यवस्था की गहन जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए। उन्होंने लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर पेयजल की गुणवत्ता और जल आपूर्ति प्रणालियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पाइपलाइन लीकेज, सीवेज का पानी मिलना या जल स्रोतों की नियमित सफाई न होना ऐसे मामलों के प्रमुख कारण हो सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और क्षेत्र में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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