'राजोआना की दया याचिका पर दो हफ्ते में विचार किया जाए', सुप्रीम कोर्ट का राष्ट्रपति से अनुरोध

शीर्ष अदालत ने 25 सितंबर को राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन से जवाब मांगा था। राजोआना को 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट मामले में दोषी पाया गया था।

Monday, November 18, 2024 - 19:00
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'राजोआना की दया याचिका पर दो हफ्ते में विचार किया जाए', सुप्रीम कोर्ट का राष्ट्रपति से अनुरोध

नई दिल्ली (आरएनआई) सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के सचिव को बेअंत हत्याकांड के दोषी बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि राजोआना की दया याचिका पर आज से दो सप्ताह के अंदर विचार किया जाए। दरअसल, मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सचिव को निर्देश दिया कि वह 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाले बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका को राष्ट्रपति के सामने विचार के लिए रखें। न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने राष्ट्रपति से दो सप्ताह के भीतर याचिका पर विचार करने का अनुरोध किया।

पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष रूप से आज का दिन तय किए जाने के बावजूद भारत संघ की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ। पीठ केवल इसी मामले की सुनवाई के लिए बैठी थी। सुनवाई की इससे पहले की तारीख में मामले को स्थगित कर दिया गया था, ताकि केंद्र सरकार राष्ट्रपति कार्यालय से यह निर्देश ले सके कि दया याचिका पर कब तक निर्णय लिया जाएगा। 

कोर्ट ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता मृत्युदंड का सामना कर रहा है, हम भारत के राष्ट्रपति के सचिव को निर्देश देते हैं कि वह मामले को राष्ट्रपति के समक्ष रखें और उनसे अनुरोध करें कि वह आज से दो सप्ताह के भीतर इस पर विचार करें। मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी।

इससे पहले शीर्ष अदालत ने 25 सितंबर को राजोआना की याचिका पर केंद्र, पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन से जवाब मांगा था। राजोआना को 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट मामले में दोषी पाया गया था। इस घटना में तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह तथा 16 अन्य लोग मारे गए थे। विशेष अदालत ने राजोआना को जुलाई, 2007 में मौत की सजा सुनाई थी।

राजोआना ने अपनी याचिका में कहा है कि मार्च 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने उसकी ओर से क्षमादान का अनुरोध करते हुए संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत एक दया याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल तीन मई को राजोआना को सुनाई गई मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने से इनकार कर दिया था।

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