‘मैं आरएसएस की संगठन क्षमता का प्रशंसक हूं’, दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की कमजोरी पर भी किया खुलासा
नई दिल्ली (आरएनआई)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संगठनात्मक ताकत की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि वह उसकी विचारधारा से असहमत हैं, लेकिन उसकी संगठन क्षमता के प्रशंसक जरूर हैं। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कांग्रेस पार्टी आंदोलन तो करती है, लेकिन उसे वोटों में बदलने में अक्सर चूक जाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की एक पुरानी तस्वीर साझा करने के बाद दिग्विजय सिंह चर्चा में आए थे। इस तस्वीर में मोदी, आडवाणी के पैरों के पास बैठे नजर आते हैं। इस पर अपनी प्रतिक्रिया को दोहराते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह शुरू से आरएसएस की विचारधारा के विरोधी रहे हैं, क्योंकि उनके अनुसार संघ पूरी तरह संविधान और कानूनों को नहीं मानता और यह एक अपंजीकृत संगठन है। इसके बावजूद उन्होंने स्वीकार किया कि आरएसएस की संगठन क्षमता असाधारण है। उन्होंने कहा कि यह सोचने वाली बात है कि बिना पंजीकरण के भी संघ इतना शक्तिशाली बन गया कि देश के प्रधानमंत्री लालकिले से उसे दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ कह देते हैं।
कांग्रेस की स्थिति पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि पार्टी में सुधार की हमेशा गुंजाइश रहती है। उन्होंने माना कि कांग्रेस मूल रूप से एक आंदोलनकारी पार्टी रही है और उसने देशभर में कई बड़े आंदोलन किए हैं, लेकिन वह इन आंदोलनों को वोटों में बदलने में अक्सर असफल रहती है। यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
गौरतलब है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक से पहले दिग्विजय सिंह द्वारा साझा की गई तस्वीर और उस पर की गई टिप्पणी ने सियासी हलकों में बहस छेड़ दी थी। उन्होंने उस तस्वीर को संगठन की ताकत का प्रतीक बताते हुए लिखा था कि कैसे एक जमीनी स्वयंसेवक और कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री तक पहुंचता है।
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