ब्रज का अनूठा रंगोत्सव: मथुरा के बछगांव में जूता-चप्पल से खेली गई होली, 150 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी कायम

Wednesday, March 4, 2026 - 15:20
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ब्रज का अनूठा रंगोत्सव: मथुरा के बछगांव में जूता-चप्पल से खेली गई होली, 150 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी कायम

मथुरा (आरएनआई)। ब्रज की होली विश्वभर में अपनी विविध और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। इसी कड़ी में मथुरा जनपद की बछगांव की जूता-चप्पल मार होली विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह परंपरा करीब 100 से 150 वर्ष पुरानी बताई जाती है और अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ी मानी जाती है।

बताया जाता है कि सौंख क्षेत्र में अंग्रेजों द्वारा किए गए अत्याचारों के विरोध स्वरूप गांव में इस अनूठी होली की शुरुआत हुई थी। तभी से धुलंडी के दिन यहां जूता-चप्पल मारकर होली खेलने की परंपरा चली आ रही है। हालांकि यह सब पूरी तरह प्रतीकात्मक और हंसी-खुशी के माहौल में होता है। खास बात यह है कि बड़े अपने से छोटों को जूता या चप्पल हल्के से मारकर आशीर्वाद देते हैं और इसे शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा का कोई भी बुरा नहीं मानता, बल्कि इसे सम्मान और स्नेह के रूप में स्वीकार किया जाता है।

गोवर्धन तहसील के अंतर्गत आने वाले इस गांव में धुलंडी के दिन सुबह से शाम तक यही रंग चलता है। इसके बाद बुजुर्ग फाल्गुन के रसिया, ब्रजगीत और भजनों की स्वर लहरियों पर थिरकते नजर आते हैं। पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से भर उठता है। ग्रामीणों के अनुसार, इस परंपरा के माध्यम से सकारात्मक सोच, आपसी प्रेम और सही दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया जाता है।

ब्रज की इस अद्भुत और अनूठी होली को गांववासी हर वर्ष शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाते हैं, जो यहां की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मृतियों को आज भी जीवंत रखे हुए है।

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