नक्सलवाद के खात्मे की निर्णायक घड़ी: 50 हजार जवान अंतिम अभियान में, 150 के करीब नक्सली बचे
नई दिल्ली (आरएनआई)। देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य के साथ सुरक्षा बल अब निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं। अमित शाह द्वारा तय 31 मार्च की समयसीमा से पहले अंतिम बड़े अभियान की तैयारी पूरी कर ली गई है। सूत्रों के अनुसार, देशभर में अब केवल 100 से 150 नक्सली ही सक्रिय बचे हैं, जो छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और तेलंगाना के दुर्गम इलाकों में छिपे हुए हैं।
आने वाले 48 घंटों में सुरक्षा बलों द्वारा व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा, जिसमें कोबरा कमांडो, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के करीब 50 हजार जवान शामिल होंगे। इन अभियानों का उद्देश्य छिपे हुए नक्सलियों को बाहर निकालना और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है।
पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, जिसमें कई शीर्ष नक्सली नेता मारे गए या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। इससे नक्सल संगठन की ताकत काफी कमजोर पड़ चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि अब बचे हुए नक्सली बड़े हमले करने की स्थिति में नहीं हैं, हालांकि वे आईईडी विस्फोट जैसे हमलों के जरिए नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।
इस पूरे अभियान में कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। जंगल युद्ध में माहिर ये कमांडो कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने में सक्षम हैं और नक्सल विरोधी अभियानों में लगातार प्रभावी साबित हुए हैं।
सुरक्षा बलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि विश्वास बहाली पर भी जोर दिया है। गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया जा रहा है, उन्हें विकास योजनाओं से जोड़ने की कोशिश हो रही है और साथ ही खुफिया जानकारी भी जुटाई जा रही है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि इस अंतिम अभियान के बाद देश नक्सलवाद के लंबे दौर से बाहर निकल सकेगा और प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
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