गाजीपुर एनकाउंटर पर उठे सवाल, विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव; न्यायिक प्रक्रिया को लेकर फिर छिड़ी बहस
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में होटल व्यवसायी विनीत राय हत्याकांड के मुख्य आरोपी बताए जा रहे कमलेश चौधरी के पुलिस एनकाउंटर के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। एनकाउंटर के विरोध में गुरुवार शाम बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और कमलेश का शव रखकर प्रदर्शन किया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब जाम हटाने पहुंची पुलिस पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव कर दिया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें एक इंस्पेक्टर और एक उपनिरीक्षक भी शामिल हैं। घायल पुलिसकर्मियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
कमलेश चौधरी की पत्नी मनीषा ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके पति निर्दोष थे और पुलिस उन्हें रामपुर से हिरासत में लेकर आई थी। मनीषा का दावा है कि थाने में उनके पति के साथ मारपीट की गई और बाद में उनका एनकाउंटर कर दिया गया। हाल ही में विवाह बंधन में बंधे इस दंपति की शादी को मात्र 37 दिन हुए थे। मनीषा ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि कमलेश चौधरी विनीत राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी था और कार्रवाई कानून के तहत की गई। हालांकि, एनकाउंटर के बाद जिस तरह से स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुआ, उसने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
घटना के बाद एक बार फिर पुलिस एनकाउंटर और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोपी के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाना चाहिए। हाल के वर्षों में अदालतों ने भी कई मामलों में स्पष्ट किया है कि सजा देना न्यायपालिका का अधिकार है, जबकि पुलिस की भूमिका जांच और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित है।
फिलहाल गाजीपुर में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। पुलिस पथराव की घटना की भी जांच कर रही है और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है। वहीं, एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
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