इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: चाइनीज मांझे पर रोक के बावजूद बिक्री पर सरकार से मांगा जवाब
प्रयागराज (आरएनआई)। चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद उसकी खुलेआम बिक्री को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार से इस पर की गई कार्रवाई का विस्तृत जवाब तलब करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता को एक महीने के भीतर निर्देश प्राप्त कर जवाब दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने यह आदेश देवरिया निवासी अधिवक्ता प्रदीप पांडे की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने याची को निर्देश दिया है कि वह 48 घंटे के भीतर याचिका की प्रति मुख्य स्थायी अधिवक्ता को उपलब्ध कराएं। मामले की अगली सुनवाई एक माह बाद निर्धारित की गई है।
याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 में अनुराग मिश्रा बनाम राज्य मामले में चाइनीज मांझे के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बाद 14 जनवरी 2026 को हिमांशु श्रीवास्तव बनाम राज्य जनहित याचिका में भी अदालत ने अपने पुराने आदेशों को दोहराते हुए उनके कड़ाई से पालन के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांझा बाजारों में खुलेआम बिक रहा है।
याची ने दलील दी कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 22 जनवरी 2026 को प्रयागराज में मांझे की चपेट में आने से अधिवक्ता अनूप श्रीवास्तव घायल हो गए थे। इसके अलावा जौनपुर, उन्नाव, मेरठ और लखनऊ सहित कई जिलों में बीते एक वर्ष के दौरान मांझे से हादसों में कई लोगों की मौत और कई के घायल होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा न केवल दुकानों पर बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी आसानी से उपलब्ध है, जो नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि प्रतिबंध के पालन के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
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