पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए खून बेच रहे छात्र, आर्थिक तंगी ने बढ़ाई मुश्किलें
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कुछ छात्रों की आर्थिक मजबूरी का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नीट और एसएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी, कोचिंग फीस, हॉस्टल और मेस का खर्च उठाने के लिए कुछ छात्र पैसे के बदले अपना खून निकलवाने को मजबूर हैं। इनमें ग्रामीण और किसान परिवारों से आने वाले छात्र भी शामिल हैं, जो पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के साथ कभी-कभी घर पर भी पैसे भेजते हैं।
दैनिक भास्कर की एक अंडरकवर रिपोर्ट में छात्रों ने अपनी आर्थिक परेशानियां साझा कीं। छात्रों के मुताबिक, उनके पिता खेती करते हैं, लेकिन सीमित जमीन और आमदनी के कारण परिवार के लिए घर का खर्च और महंगी पढ़ाई का खर्च एक साथ उठाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में वे अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशते हैं। रिपोर्ट में कुछ छात्रों ने दावा किया कि वे महीने में कई बार रक्त निकलवाकर पैसे जुटाते हैं।
एक छात्र ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि पढ़ाई का मौका दोबारा मिले या न मिले, लेकिन शरीर में खून बनता रहेगा। यह सोच उन छात्रों के दबाव को दिखाती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने का सपना देख रहे हैं। हालांकि, बार-बार रक्त निकलवाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है और इसे पढ़ाई का खर्च जुटाने का सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता।
प्रयागराज लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से छात्र नीट, एसएससी तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। कोचिंग, किराए के कमरे, भोजन और अध्ययन सामग्री पर होने वाला खर्च कई परिवारों के बजट पर भारी पड़ता है। आर्थिक सहायता की कमी के कारण कुछ विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।
प्रयागराज में पहले भी अवैध रूप से रक्त की खरीद-बिक्री से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 2022 में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिस पर जरूरतमंद लोगों से कम कीमत पर रक्त लेकर मरीजों के परिजनों को महंगे दामों पर बेचने का आरोप था। हालांकि, पुराने मामलों के आधार पर मौजूदा रिपोर्ट में सामने आए सभी छात्रों के रक्त निकलवाने के तरीकों या उनसे जुड़े लोगों के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
यह मामला शिक्षा के बढ़ते खर्च, आर्थिक असमानता और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए सहायता की कमी जैसे सवाल उठाता है। विशेषज्ञों और प्रशासन के लिए जरूरी है कि ऐसे विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति, फीस सहायता और अन्य शैक्षणिक योजनाओं की जानकारी पहुंचे, ताकि उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने स्वास्थ्य को जोखिम में डालने जैसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
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