PWD के पूर्व कार्यपालन यंत्री केके गर्ग पर विभागीय जांच शुरू, 15 दिन में मांगा जवाब
लोक निर्माण विभाग (PWD) संभाग-1 में पदस्थ रहे तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE) केके गर्ग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शासन को वित्तीय क्षति पहुँचाने और ठेकेदार से सांठ-गांठ करने के गंभीर आरोपों में उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। प्रमुख अभियंता की जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग के उपसचिव राजेश शाह ने 5 मुख्य बिंदुओं पर आरोप पत्र तय करते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, केके गर्ग को अगले 15 दिनों के भीतर उपसचिव के समक्ष प्रस्तुत होकर अपने बचाव में स्पष्टीकरण देना होगा।
192 लाख का अनुबंध, 221 लाख का अंतिम भुगतान
मामला वर्ष 2022-23 का है, जब पिपराही-जड़कुड़ मार्ग के उन्नयन का कार्य चल रहा था। आरोप है कि तत्कालीन कार्यपालन यंत्री गर्ग ने इस मार्ग के 19 किलोमीटर हिस्से में बीटी रिन्यूअल एवं रिपेयरिंग कार्य के लिए 'मेसर्स संजीव कंस्ट्रक्शन' के साथ 192.90 लाख रुपये का अनुबंध किया था।
प्रमुख अभियंता की जांच में सामने आया कि पूरे 25 किलोमीटर मार्ग के लिए 22.50 करोड़ रुपये का एस्टीमेट मांगा गया था, जिससे बीटी रिन्यूअल की राशि के अनुचित दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं, एसओआर (SOR) में ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से रिवाइज्ड कॉस्ट को 192.90 लाख रुपये से बढ़ाकर 221.93 लाख रुपये कर दिया गया और अंतिम भुगतान भी कर दिया गया, जिससे शासन को भारी आर्थिक चपत लगी।
सेवानिवृत्त हो रहे 3 SDO का क्लेम रोकने के निर्देश
मामले में सख्ती बरतते हुए अधीक्षण अभियंता (SE) ने PWD संभाग-1 के कार्यपालन यंत्री को पत्र लिखकर 3 अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) के सेवानिवृत्ति क्लेम रोकने के आदेश दिए हैं।
जांच पूरी होने तक जिन अधिकारियों का भुगतान रोका गया है, उनमें:
अंगिरा प्रसाद तिवारी (एसडीओ, त्योंथर उप संभाग)
एस.के. द्विवेदी (एसडीओ, मनगवां PWD — जून में सेवानिवृत्त)
ओ.एन. मिश्रा (एसडीओ, EE कार्यालय)
ये तीनों अधिकारी जून से अगस्त के बीच सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विभागीय जांच पूरी होने तक इनके पेंशन व अन्य देयकों पर रोक लगा दी गई है.
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